ग्रामीणों को मिलेगा भूखंड का मालिकाना हक, 10 जिलों में चलेगा पायलट प्रोजेक्ट

भोपाल| प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों (Rural areas) में रह रहे लोगों को अब भूखंड का मालिकाना हक मिलेगा। इसके लिए ग्रामीण बसाहटों का सर्वे जून के पहले सप्ताह में हरदा और डिंडौरी (Harda and Dindori) से शुरू किया जाएगा। इस योजना के प्रथम वर्ष में प्रदेश के 10 जिलों का चयन किया गया है। शेष जिले अगले वर्ष लिये जायेंगे।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अभी तक भारत में ग्रामीण क्षेत्र में आबादी की भूमियों का सर्वेक्षण और अभिलेख का कार्य नहीं किया गया था। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी-बड़ी आवासीय सम्पत्ति होने पर भी वे ग्रामीणों की आड़े वक्त पर काम नहीं आ पाती थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्रामीण भारत की इस समस्या को समझा तथा इतिहास में पहली बार ग्रामीणों को उनकी आबादी भूमि का मालिकाना हक देने के लिये ‘स्वामित्व योजना’ प्रारंभ की है। इस योजना के प्रथम वर्ष में प्रदेश के 10 जिलों का चयन किया गया है। शेष जिले अगले वर्ष लिये जायेंगे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण आबादी क्षेत्र का सर्वे किया जाकर अधिकार अभिलेख तैयार किये जायेंगे। ग्रामीण जनता को उनके भूखण्ड पर मालिकाना हक प्रदान किये जाने के प्रमाण स्वरूप उन्हें स्वामित्व अभिलेख प्रदाय किये जायेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि ग्रामीणों के लिये यह योजना वरदान बनेगी। ग्रामवासियों को आबादी भूमि का मालिकाना हक मिलने से उन्हें सम्पत्तियों पर बैंक से ऋण लेना भी संभव होगा। पंचायतों को भी इस योजना से आय साधन बढ़ेंगे।

हरदा और डिंडोरी जिले से होगी शुरुआत
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्रामीण आबादी सर्वेक्षण योजना को प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिये है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग द्वारा आगामी जून माह के प्रथम सप्ताह में हरदा एवं डिंडोरी जिले के कुछ गाँव में कार्य प्रारंभ किया जाना प्रस्तावित है। इस संबंध में जिला कलेक्टर्स को दिशा-निर्देश जारी किये जा चुके हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि योजना के तहत प्रथम वर्ष में प्रदेश के 10 पॉयलेट जिलों का चयन किया गया है, शेष 43 जिलों का सर्वे द्वितीय एवं तृतीय वर्ष में क्रमबद्ध किया जाएगा। प्रथम चरण में शामिल 10 जिलों मुरैना, श्योपुर, सागर, शहडोल, खरगौन, विदिशा, भोपाल, सीहोर, हरदा और डिंडोरी जिले के 10 हजार 553 राजस्व गाँव शामिल किये गये है। इन सभी राजस्व गाँवों में आबादी भूमि के सर्वे का कार्य तीन चरणों में किया जाएगा।