ग्वालियर, अतुल सक्सेना।  ग्वालियर (Gwalior) का नाम बदलने की कांग्रेस नेताओं की मांग को दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने करारा झटका दिया है। कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने कहा कि ग्वालियर का नाम बदलने की मांग का मैं समर्थन नहीं करता ये गलत है।

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई (Rani Lakshmibai) की शहादत के दिन से शुरू हुई ग्वालियर (Gwalior) का नाम बदलने की राजनीति अब नए मोड़ पर आ गई है।  कांग्रेस के दिग्गज नेता पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने कांग्रेस (Congress) की मांग को नकार दिया है। शुक्रवार रात अशोकनगर में पत्रकारों से बात करते हुए दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने कहा कि ये ठीक नहीं है मैं इससे सहमत नहीं हूँ।  ग्वालियर का नाम गालव ऋषि के नाम पर हजारों वर्ष पहले रखा गया है।

गौरतलब है कि रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि पर 18 जून को इंदौर में एक कार्यक्रम में पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा (Sajjan Singh Varma)  ने ग्वालियर का नाम बदलने की मांग की थी । उसके बाद कई कांग्रेस नेताओं ने इस मांग का समर्थन किया था। इतना ही नहीं  ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia)  लोकसभा चुनाव में हराने वाले गुना शिवपुरी के भाजपा सांसद केपी यादव (BJP MP KP Yadav) ने रानी को पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कांग्रेस की मांग का ये कहकर समर्थन किया था कि यदि जनता चाहती है तो लक्ष्मी बाई (Lakshmibai) के नाम पर ग्वालियर का नाम रख दो।

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उधर 21 जून को वैक्सीनेशन महाअभियान में शामिल होने ग्वालियर पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) से जब पत्रकारों ने नाम बदलने की कांग्रेस (Congress) की मांग पर सवाल किया था तो सिंधिया ने कांग्रेस को नसीहत दी थी कि नाम बदलना है तो कांग्रेस अपनी पार्टी का बदले जिससे लोगों के दिलों में फिर जगह बना सके।

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बहरहाल भाजपा द्वारा शहरों और रेलवे स्टेशनों के नाम बदलने की नई शुरुआत में कांग्रेस ने ग्वालियर का  नाम बदलने की मांग रखकर सिंधिया पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधने की कोशिश की है क्योंकि लक्ष्मीबाई और सिंधिया के परिवार को लेकर इतिहास में जो दर्ज हैं उसे लेकर पहले भाजपा सिंधिया को घेरती रही है अब कांग्रेस मौका छोड़ना नहीं चाहती।  लेकिन दिग्विजय सिंह जैसे दिग्गज नेता द्वारा अपनी ही पार्टी की मांग को नकारना देखते हैं क्या सियासी बदलाव लाते हैं।

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