निगम कमिश्नर पर लगे हिटलरशाही के आरोप, विरोध में धरना प्रदर्शन

ग्वालियर।अतुल सक्सेना।

नगर निगम ग्वालियर के कर संग्राहकों ने निगम कमिश्नर पर हिटलरशाही और मानसिक प्रताड़ना देने के गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यालय भवन पर धरना दिया और प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि अभी अपनी बात रखने यहाँ आये हैं यदि सुनवाई नहीं हुई तो मुख्यमंत्री तक जायेंगे। ग्वालियर शहर के लोगों से सम्पति कर सहित अन्य कर वसूल रहे नगर निगम के कर संग्राहकों ने निगम कमिश्नर संदीप माकिन पर वसूली के लिए मनमाना टार्गेट थोपने के आरोप लगाए हैं। सभी कर संग्राहकों ने विरोध करते हुए सोमवार को काम बंद कर दिया और निगम मुख्यालय पर धरना दिया।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शैलेंद्र सिंह चौहान का कहना था कि कमिश्नर उस टार्गेट को 2 महीने में पूरा करने के लिए कह रहे हैं जो 10 महीने में पूरा होता है। उन्होंने बताया कि हम लोगों के एक दिन का वसूली टार्गेट डेढ़ करोड़ रुपए है। कर संग्राहकों ने आरोप लगाए कि हमें ना तो त्योहारों की छुट्टी मिलती है ना रविवार की । बल्कि छुट्टी वाले दिन सुबह 8 बजे बुलाते हैं रात तक काम कराते हैं । हम अपने घर परिवार को भी समय नहीं दे पा रहे । प्रदर्शन में शामिल टीसी ने कमिश्नर पर मानसिक प्रताड़ना देने और हिटलरशाही के आरोप लगाए। आक्रोशित कर संग्राहकों ने कहा कि रविवार को हमने 13 लाख की वसूली की फिर भी रविवार को मीटिंग में बुलाकर बे इज्जत किया गया। इन्होंने आरोप लगाए कि कमिश्नर संदीप माकिन उम्र तक का लिहाज नहीं करते वे रिटायरमेंट के नजदीक पहुँच चुके कर्मचारियों सहित उन कर्मचारियों को भी बे इज्जत करते हैं जिनका 95 प्रतिशत टार्गेट पूरा है।

उधर धरना दे रहे कर संग्राहकों से मिलने आये उपायुक्त संपत्ति कर जगदीश अरोरा ने किसी भी तरह के धरना प्रदर्शन की बात से इंकार किया। उन्होंने कहा कि हम सब एक परिवार का हिस्सा हैं । सबकी बात रखने का तरीका अलग अलग होता है। यहाँ भी ये अपनी बात रखने आये हैं। हम सबको मिलकर वसूली का टार्गेट पूरा करना है।

उपायुक्त ने कमिश्नर का बचाव करते हुए मनमानी के आरोप से इंकार किया और कहा कि परिवार में कभी बड़ा किसी बात पर डांट देता है तो कभी छोटा भी उत्तेजना में कुछ कह जाता है। हालांकि उपायुक्त इसे परिवार की बात बताकर टाल रहे हैं लेकिन कर संग्राहकों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि निगम कमिश्नर हमारी बात नहीं सुनते हैं तो हैं संभाग आयुक्त के पास जायेंगे और यदि वहां भी सुनवाई नहीं हुई तो मुख्यमंत्री के पास अपनी बात पहुंचायेंगे।