बेतहाशा शुल्क वृद्धि के खिलाफ कांग्रेस आक्रोशित, वापस नहीं लेने पर आंदोलन की चेतावनी

ग्वालियर। अतुल सक्सेना| नगर निगम ग्वालियर द्वारा जनता के ऊपर थोपे जा रहे नये कर और पुराने करों एवं शुल्कों में की गई बेतहाशा वृद्धि के खिलाफ कांग्रेस ने आक्रोश जताया है। कांग्रेस का कहना है कि आज ग्वालियर में निर्वाचित परिषद नहीं है जिसका लाभ उठाकर नगर निगम आयुक्त मनमानी कर रहे हैं। जिसे कांग्रेस स्वीकार नहीं करेगी। करों में की गई वृद्धि के खिलाफ कांग्रेस ने सोमवार को संभाग आयुक्त जो ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि यदि इसे वापस नहीं लिया गया तो ये आक्रोश जन आंदोलन में बदल जायेगा।

नगर निगम ग्वालियर में तीन बार निर्वाचित रहे कांग्रेस के पूर्व पार्षद एवं जिला कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा के नेतृत्व में सोशल डिस्टेनसिंग का पालन करते हुए एक शिष्टमंडल ने सम्भागीय आयुक्त एम बी ओझा को ज्ञापन देकर मांग की कि वर्तमान में नगर निगम ग्वालियर में निर्वाचित परिषद नहीं होने के कारण नगर निगम आयुक्त संदीप माकिन द्वारा मनमानी पूर्ण तरीके से एवं अविवेकपूर्ण निर्णय लेकर कोरोना जैसी महामारी के बीच आम जनता एवं प्रत्येक भवन स्वामी पर अव्यवहारिक शुल्क थोप दिया है जो कतई व्यवाहारिक नहीं है। ज्ञापन में कहा गया कि निगम आयुक्त ने भवन स्वामियों पर नामांकन शुल्क जो पूर्व में मात्र 50/- रुपए लगता था उसे सौ गुना बढ़ाकर 5000/-रुपये कर दिया है, इसी प्रकार कचरा शुल्क के नाम पर एक नया कर प्रत्येक दुकानदार पर भी थोप दिया है यदि ग्वालियर के किसी भी दुकानदार के पास 400 वर्गफुट की कोई दुकान है तो उसे 500/-रुपये कचरा शुल्क देना होगा और यदि उसकी दुकान 401 वर्ग फुट की है तो उसे 4000 /- रुपये कचरा शुल्क देना होगा जो किसी भी तरह से व्यवाहारिक नहीं कहा जा सकता जबकि नगर निगम में पूर्व से ही समेकित कर के नाम पर सफाई शुल्क वसूला जा रहा है कर के ऊपर कर यह अन्याय पूर्ण है। इस प्रकार मनमाने ढंग से बढ़ाये गये नामांकन शुल्क एवं कचरा शुल्क को समाप्त किया जाए।

ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि नगर निगम के अधिकांश पुराने कर्मचारी रिटायर हो जाने से नगर निगम ने विगत कुछ वर्षों से ठेका प्रथा प्रणाली से आउट सोर्स कर्मचारियों से निगम का कार्य कराया जा रहा है और ऐसे कर्मचारी बखूबी अपना कार्य भी कर रहे हैं वर्तमान में तो इन्हीं आउट सोर्स कर्मचारियों ने निगम के स्थायी कर्मचारियों की अपेक्षा कोरोना जैसी महामारी के चलते अपनी और अपने परिवार की चिंता ना करते हुए पूरी लगन एवं निष्ठा से शहर के चैकिंग पाइंटों पर कार्य कर अपनी कर्तव्यपरायणता का परिचय देकर अपना फर्ज निभाया है जबकि उनके नियोक्ता ठेकेदार द्वारा नगर निगम ग्वालियर में आउट सोर्स कर्मचारियों को 6 – 6 माह से वेतन भी नहीं दिया जाता है। निगम में 3-3 वर्षो से कार्यरत रहने के बावजूद कर्मचारियों के ईपीएफ के खातों में उनके हिस्से की रकम ठेकेदार द्वारा जमा नहीं की जा रही है और ना ही ईएसआई कार्ड भी बनाये गए हैं जिससे कभी उनके स्वास्थ्य की हानि होने पर कर्मचारी और उनके परिवार को इलाज की सुविधा भी प्राप्त हो सके। इसलिये ठेकेदार द्वारा आउट सोर्स कर्मचारियों पर किये जा रहे अमानवीय व्यवहार के कारण निगम में ठेका प्रथा प्रणाली समाप्त कर इन कर्मचारियों का नगर निगम में नियमितीकरण किया जावे।
पूर्व पार्षद आनंद शर्मा ने नगर निगम प्रशासक एवं सम्भागीय आयुक्त को ज्ञापन देते हुए यह भी कहा कि यदि हमारी उपरोक्त मांगों पर विचार कर निगम ने उचित एवं व्यवाहारिक निर्णय नहीं लिया तो मजबूर होकर कांग्रेसजनों को ग्वालियर के आम नागरिकों,भवन स्वामियों एवं दुकानदार के हित में गांधीवादी तरीके से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए जनआंदोलन करने का निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा जिसकी पूरी जबाबदारी नगर निगम प्रशासन की होगी। सम्भागीय आयुक्त को ज्ञापन देने वालों में नगर निगम ग्वालियर के पूर्व उपनेता प्रतिपक्ष चतुर्भुज धनोलिया, मुरार कनट्यूनमेन्ट के पूर्व पार्षद राकेश चौहान, पूर्व पार्षद जयनारायण सगर, कांग्रेस नेता मोनू सोलंकी, अनिल शर्मा एवं अनूप तिवारी आदि प्रमुख थे।