Gwalior News : वीरांगना लक्ष्मीबाई बलिदान मेले में बही देशभक्ति की सरिता, समाजसेवी मीनाक्षी ताई वीरांगना सम्मान से विभूषित, महानाट्य और कवि सम्मेलन भी हुआ

जिनके बलिदान से हमें आजादी मिली और हम सब खुली हवा में साँस ले रहे हैं। ऐसी ही महान बलिदानी वीरांगना लक्ष्मीबाई के सम्मान में ग्वालियर में बलिदान मेला का आयोजन सराहनीय और अनुकरणीय पहल है।

Atul Saxena
Published on -
Gwalior News : रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान को याद रखने और आजादी की महानायिका को नमन करने के लिए हर साल उनकी समाधि पर वीरांगना बलिदान मेले का आयोजन किया जाता है, इस साल इसका 25 वां वर्ष है, इस बार भी दो दिवसीय आयोजन 17 और 18 जून को हुआ, अंतिम दिवस के कार्यक्रम में इस वर्ष का वीरांगना सम्मान मातृ शक्ति की राष्ट्रीय प्रमुख सुश्री मीनाक्षी ताई पिशवे को दिया गया।  इस अवसर पर महान क्रांतिकारी अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद के सहयोगी क्रांतिकारी रुद्रनारायण के प्रपौत्र गौरव नारायण को सम्मानित किया गया वहीं देश की रक्षा के लिए अदम्य साहस का परिचय देकर अपने प्राणों की आहुति देने वाले चंबल के शहीद सतेन्द्र सिंह राजावत के परिजन को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के नगरीय विकास व आवास एवं संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय थे, अध्यक्षता  महामण्डलेश्वर संत उत्तम स्वामी जी महाराज ने की, इस अवसर पर उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, बलिदान मेले के संस्थापक अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री  जयभान सिंह पवैया एवं  अन्य अतिथियो ने इन सभी को सम्मान प्रदान किए।

बलिदान मेला का आयोजन सराहनीय और अनुकरणीय पहल : कैलाश विजयवर्गीय 

मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जिन महान विभूतियों ने देश व अपनी संस्कृति के बारे में सोचा और देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। जिनके बलिदान से हमें आजादी मिली और हम सब खुली हवा में साँस ले रहे हैं। ऐसी ही महान बलिदानी वीरांगना लक्ष्मीबाई के सम्मान में ग्वालियर में बलिदान मेला का आयोजन सराहनीय और अनुकरणीय पहल है। उन्होंने इसके लिये बलिदान मेला के संस्थापक अध्यक्ष और पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया की सराहना की और उनके प्रति धन्यवाद जताया। उन्होंने कहा कि इतिहास से सीख लेकर हम वर्तमान को संभालते हुए भविष्य में श्रेष्ठ भारत का निर्माण कर सकते हैं।

बलिदान मेला देशभक्ति जगाने और देशभक्ति के बीज बोने का अनुष्ठान एवं महायज्ञ है : पवैया 

बलिदान मेला के संस्थापक अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि बलिदान मेला देशभक्ति जगाने और देशभक्ति के बीज बोने का अनुष्ठान एवं महायज्ञ है। आज से 166 साल पहले ग्वालियर की इसी पावन धरा पर वीरांगना लक्ष्मीबाई ने भारत माता के श्रीचरणों में अपने प्राणों की आहुति दी थी। उन्होंने कहा सन् 2000 से यह आयोजन प्रारंभ किया गया है। इस आयोजन के माध्यम से उन सब शहीदों को जिन्होंने अपने प्राणों की आहूति इस राष्ट्र की रक्षा और निर्माण के लिये दे दी है, उनके प्रति हम सब कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं। श्री पवैया ने बलिदान मेला आयोजन में ग्वालियर शहरवासियों की सक्रिय भागीदारी पर भी हर्ष और आभार व्यक्त किया। पवैया ने कहा कि वीरांगना लक्ष्मीबाई ने सरल रास्ता न चुनकर स्वाभिमान व देशभक्ति का रास्ता चुना।

वीरांगना लक्ष्मीबाई पर केन्द्रित महानाट्य एवं अखिल भारतीय कवि सम्मेलन भी हुआ

वंदे मातरम् ग्रुप द्वारा वीरांगना लक्ष्मीबाई पर केन्द्रित महानाट्य की प्रस्तुति दी गई। इस महानाट्य में लगभग 250 कलाकारों ने भाग लिया। इसमें जीवित घोड़े, ऊंटों के साथ मंचन को दर्शकों द्वारा बेहद सराहा गया। कलाकारों की भावों से भरी प्रस्तुति ने बलिदान मेले में बड़ी संख्या में मौजूद शहरवासियों के दिलों में देशभक्ति का जज्बा हिलोरे लेने लगा। साथ ही बहुत से लोगों की आँखे नम हो गईं। कार्यक्रम के अंत में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिसमें राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कविताओं से प्रांगण गूँज उठा।
Gwalior News : वीरांगना लक्ष्मीबाई बलिदान मेले में बही देशभक्ति की सरिता, समाजसेवी मीनाक्षी ताई वीरांगना सम्मान से विभूषित, महानाट्य और कवि सम्मेलन भी हुआ
Gwalior News : वीरांगना लक्ष्मीबाई बलिदान मेले में बही देशभक्ति की सरिता, समाजसेवी मीनाक्षी ताई वीरांगना सम्मान से विभूषित, महानाट्य और कवि सम्मेलन भी हुआ
Gwalior News : वीरांगना लक्ष्मीबाई बलिदान मेले में बही देशभक्ति की सरिता, समाजसेवी मीनाक्षी ताई वीरांगना सम्मान से विभूषित, महानाट्य और कवि सम्मेलन भी हुआ

About Author
Atul Saxena

Atul Saxena

पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं ....

Other Latest News