रियासतकालीन मंदिर के पुजारी ने “महाराज” पर लगाए मंदिर की जमीन हड़पने के आरोप

ग्वालियर ।अतुल सक्सेना

शहर के प्राचीन मंदिर भूतेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी परिवार ने सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के इशारे पर उन्हें मंदिर से बेदखल कर जमीन हड़पने की साजिश रचने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पुजारी परिवार की मुखिया ने अपने परिवार की जान को भी खतरा बताया है।

सिंधिया रियासतकाल के समय से स्थित भूतेश्वर महादेव मन्दिर शब्द प्रताप आश्रम के पुजारी स्वर्गीय शंभू नाथ शर्मा की पत्नी चंद्रवती शर्मा ने ने अपने बेटे अमन शर्मा और उनकी पत्नी के साथ भोपाल में मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि राज्यसभा सदस्य। ज्योतिरादित्य सिंधिया के इशारे पर सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट जिले के प्रशासनिक अधिकारियों से मिली भगत कर उनके परिवार को मंदिर से बेदखल करने की कोशिश की जा रही है। चंद्रवती शर्मा ने आरोप लगाए कि सिंधिया के वकील प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आकर दबाव बन रहे हैं जिससे हम पंडिताई और मंदिर दोनों छोड़ दे। हम चार पीढ़ियों से मंदिर में रह रहे हैं और इसकी पूजा कर देखभाल कर रहे हैं। चंद्रवती ने साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए बताया कि सरकारी दस्तावेजों में भूतेश्वर मंदिर औकाफ के आधिपत्य की है जिसके प्रबंधक कलेक्टर है उन्होंने बताया कि 1935 से ये सरकारी दस्तावेजों में औकाफ विभाग में देवस्थान ट्रस्ट भूतेश्वर मंदिर के नाम पर सर्वे क्रमांक 573, 574, 575, 576, 772,773 पर दर्ज है जिसे ये लोग सिंधिया के रसूख का इस्तेमाल कर खुर्द बुर्द करना चाहते हैं।

विवाद का कारण है ये जमीन

चंद्रवती ने कहा कि मंदिर की 19 बीघा जमीन जिसमें लगभग 4 बीघा नगर निगम सीमा क्षेत्र में और 15 बीघा अन्य क्षेत्र में है। जिसे सिंधिया द्वारा फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों एवं प्रशासनिक अधिकारियों की मिली भगत से बेचा जा रहा है। चंद्रवती ने कहा कि सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट अपंजीकृत संस्था है। जबकि मप्र राजपत्र 18 मार्च 1971 की अधिसूचना द्वारा इस ट्रस्ट को 1968 में मप्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट 1951 कीए प्रावधानों से जो छूट दी गई थी वो 18 मार्च 1971 के गजट नोटिफिकेशन द्वारा निरस्त की जा चुकी है। जिसकी अपील सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट द्वारा उच्च न्यायालय में 1972 में की गई थी जिसमें 25 अप्रैल 1973 के निर्णय द्वारा उच्च न्यायालय ने 1971की अधिसूचना को कायम रखते हुए सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट की याचिका खारिज कर दी थी। उसके बाद आज तक सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट ग्वालियर में रजिस्टर्ड नहीं है।

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