इंदौर में पालतू कुत्तों के रजिस्ट्रेशन पर प्रशासन सख्त, चुनाव के बाद नगर निगम में लाया जाएगा प्रस्ताव

Shashank Baranwal
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Indore News: इंदौर में लगातार कुत्तों के काटने की घटना के मद्देनजर जिला प्रशासन बड़ी कार्रवाई करने जा रहा है। जिसके बाद शहर में पालतू कुत्तों का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य हो जाएगा। इसके लिए विधानसभा चुनाव के बाद नगर निगम में प्रस्ताव लाया जाएगा और जुर्माने की राशि में बढ़ोतरी की जाएगी। वहीं अभी तक बिना रजिस्ट्रेशन के कुत्ता पालने वाले 40 मालिकों पर जुर्माने की कार्रवाई की गई है। कुत्तों के काटने की घटनाओं को देखकर प्रशासन द्वारा जुर्माने की कार्रवाई में और तेजी लाई जाएगी। बता दें कि शहर में वर्तमान समय में महज 3 हजार कुत्तों का रजिस्ट्रेशन हुआ है।

10 गुना जुर्माना बढ़ाने की तैयारी में प्रशासन

वर्तमान समय में शहर में बिना रजिस्ट्रेशन के कुत्ता पालने वाले व्यक्तियों पर 100 रूपए का जुर्माना लगाया जाता है। जिसे प्रशासन 10 गुना बढ़ाने की तैयारी में हैं। इसके बाद जुर्माने की राशि बढ़कर 1 हजार रूपए हो जाएगी। वहीं प्रशासन द्वारा उम्मीद की जा रही है कि जुर्माने की राशि बढ़ाने से नियमों के पालन में तेजी आएगी। बता दें कुत्ते का रजिस्ट्रेशन पशु चिकित्सालय में होगा। वहां सबसे पहले कुत्तों का टीकाकरण किया जाएगा। फिर कुत्ते का रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र और बैज नंबर दिया जाएगा।

हर महीने 4 हाजार से ज्यादा मरीज होते हैं घायल

आपको बता दें कुत्तों के काटने की घटना दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। शहर के निजी अस्पतालों और हुकुमचंद पॉली क्लीनिक में कुत्तों के काटने से हर महीने 4 हजार से ज्यादा घायल एडमिट होते हैं। इस तरह के बढ़ते हुए मामले को देखकर अधिकारी डॉक्टर उत्तम यादव ने जानकारी दी है कि इस घटना को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाएं जाएंगे।


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पत्रकारिता उन चुनिंदा पेशों में से है जो समाज को सार्थक रूप देने में सक्षम है। पत्रकार जितना ज्यादा अपने काम के प्रति ईमानदार होगा पत्रकारिता उतनी ही ज्यादा प्रखर और प्रभावकारी होगी। पत्रकारिता एक ऐसा क्षेत्र है जिसके जरिये हम मज़लूमों, शोषितों या वो लोग जो हाशिये पर है उनकी आवाज आसानी से उठा सकते हैं। पत्रकार समाज मे उतनी ही अहम भूमिका निभाता है जितना एक साहित्यकार, समाज विचारक। ये तीनों ही पुराने पूर्वाग्रह को तोड़ते हैं और अवचेतन समाज में चेतना जागृत करने का काम करते हैं। मशहूर शायर अकबर इलाहाबादी ने अपने इस शेर में बहुत सही तरीके से पत्रकारिता की भूमिका की बात कही है– खींचो न कमानों को न तलवार निकालो जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो मैं भी एक कलम का सिपाही हूँ और पत्रकारिता से जुड़ा हुआ हूँ। मुझे साहित्य में भी रुचि है । मैं एक समतामूलक समाज बनाने के लिये तत्पर हूँ।

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