नतीजों से पहले कांग्रेस को झटका, आयोग ने हर राउंड के बाद प्रमाण-पत्र देने से किया इंकार

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इंदौर

आयोग ने मतगणना के पहले कांग्रेस को स्पष्ट कर दिया है कि मतगणना के दिन हर राउंड के बाद उन्हें प्रमाण पत्र नही दिया जाएगा, केवल हर बार की तरह गणना पत्रक ही दिया जाएगा। साथ ही अंतिम गणना के बाद ही प्रमाण-पत्र दिया जाएगा।बताते चले कि कांग्रेसियों ने मांग की थी कि जिस तरह पिछले कुछ चुनावों में प्रत्येक राउंड के बाद प्रमाण-पत्र दिया गया था, इस बार भी ऐसा किया जाए। 

दरअसल, बीते साल उपचुनाव में सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अटेर विधानसभा के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी हेमंत कटारे ने चुनाव आयोग से प्रत्येक राउंड के बाद सर्टिफिकेट प्राप्त किए जाने का आग्रह किया था जिसे स्वीकार कर लिया गया था।इसके बाद गुजरात में भी काउंटिंग में यही फार्मूला अपनाया गया। बाद में कांग्रेस पार्टी ने चित्रकूट, कोलारस और मुंगावली में भी इसी पैटर्न से मतगणना करवाई थी।अब कांग्रेस इस बार मध्यप्रदेश मे भी ये फॉमूला अपनाने की तैयारी में है। इसके लिए आयोग से मांग भी की थी कि मतगणना के दिन हर राउंड में वोटों की गिनती के बाद निर्वाचन अधिकारी सर्टिफिकेट दे।

लेकिन उप निर्वाचन अधिकारी रजनीश श्रीवास्तव ने ऐसा करने से मना कर दिया है। अधिकारी का कहना है कि आयोग के नियमानुसार ही काम किया जाएगा। निर्वाचन आयोग के नियमानुसार इंदौर में गणना पत्रक ही दिया जाएगा। प्रमाण-पत्र नहीं दे सकेगा। इसके लिए जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र पूरी गणना के बाद दिया जाता है। हालांकि भोपाल में या अन्य शहरों में प्रमाण पत्र को देने पर आयोग को कोई आपत्ति नही।

बताते चले की हाल ही में पीसीसी चीफ ने प्रदेश के सभी 229  प्रत्याशियों को बुलाकर मतगणना के दिन कैसे क्या करना है इसकी जानकारी दी थी।मतगणना को लेकर प्रत्याशियों को प्रशिक्षण देकर समझाइश दी गई थी कि प्रशिक्षण में उन्हें प्रशासन का पक्षपातपूर्ण रवैया, डाक मतपत्रों की गणना, हर राउंड की गिनती पर मतगणना का प्रमाण-पत्र जरूर लेना है। पार्टी मशीनों में की जाने वाली छेड़खानी के साथ ही मतगणना में की जाने वाली धांधली की आशंका को लेकर सजग है।

गौरतलब है कि अबतक आम चुनाव में सभी राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद प्रत्याशी को उसे प्राप्त मतों का सर्टिफिकेट दिया जाता रहा है।लेकिन इस बार कांग्रेस उपचुनावा और गुजरात में अपनाए गए फॉर्मूले पर काम करने जा रही है। कांग्रेस को उम्मीद है कि जिस तरह से उपचुनाव और गुजरात में पार्टी को फायदा मिला था उसकी प्रकार मध्यप्रदेश में भी मिलेगा।