जबलपुर, संदीप कुमार। जबलपुर में आंगनवाड़ी का बच्चों को दिया जाने वाला पोषण आहार जानवरों को खिलाये जाने के मामले में कलेक्टर द्वारा गठित की गई जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट पेश कर दी है। इस रिपोर्ट में 6 अधिकारी और 10 कर्मचारियों को दोषी पाते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।

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कुपोषण के मामले में देश के राज्यों में प्रमुख स्थान पर आने वाले मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां बच्चों को आंगनवाड़ी के माध्यम से दिए जाने वाला पोषण आहार जानवरों की डेयरी में पहुंच रहा था और उसी जानवरों को खिलाया जा रहा था। इस मामले की जांच के लिए कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने एक जांच कमेटी गठित की। एसडीएम आधारताल नमः शिवाय अरजरिया के नेतृत्व में गठित जांच कमेटी ने महिला एवं बाल विकास के दो परियोजना अधिकारियों, 4 सुपरवाइजर और 10 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। जांच में पाया गया कि आंगनवाड़ी के बच्चों को वितरित किए जाने वाला पोषण आहार आंगनबाड़ियों की बजाय मिलीभगत से ग्राम खैरी स्थित सिडाना डेयरी में पहुंचाया जा रहा था। इसे जानवरों को खिलाया जा रहा था। डेयरी से जब्त पोषण आहार की स्टॉक रजिस्टर में एंट्री अपूर्ण पाई गई और पोषण आहार की वितरण पंजी में हितग्राहियों के हस्ताक्षर भी नहीं पाए गए। जांच दल ने यह भी पाया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा पोषण आहार अधिक मात्रा में प्राप्त किया गया और उसका आंगनवाड़ी केंद्रों में वितरण न कर गलत तरीके से डेयरी में पहुंचा दिया गया।

इस पूरे मामले में कलेक्टर ने परियोजना अधिकारी रितेश दुबे और श्रद्धा चौकसे सहित 4 पर्यवेक्षको और 10 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दोषी पाया। इनमें परियोजना अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए संभागायुक्त को लिखा गया है जबकि पर्यवेक्षकों को नोटिस जारी किए गए हैं। इसके साथ ही 10 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा समाप्ति के लिये उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। प्रकरण में दोषी पाए गए पार्वती स्व सहायता समूह और गौरी स्व सहायता समूह को ब्लैक लिस्ट कर उनके विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश कलेक्टर ने दिए हैं।