मुरैना में वन कर्मियों ने सीएम के नाम दिया ज्ञापन, आंदोलन की दी चेतावनी, यह है मामला

गांव में वनकर्मियों की गोली से ग्रामीण की हत्या के मामले में नया मोड़ आ गया है। अपने साथियों के बचाव में आज सभी वनकर्मी मैदान में कूद पड़े हैं।

मुरैना, संजय दीक्षित। मुरैना (morena) थाना क्षेत्र के अमोलपुरा (amolpura) गांव में एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत (death) हो गई थी। उसके बाद ग्रामीणों ने अपनी मांगें मनवाने के लिए सड़क पर चक्काजाम जाम कर दिया था। जिसके बाद पुलिस ने शव के अंतिम संस्कार के लिए 20 हज़ार रुपए नगद और 9 वन कर्मियों के खिलाफ हत्या सहित कई धराओं के तहत मामला दर्ज कर दिया था। उसके बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने भी शिकायत दर्ज करवाई थी। जिसमें झूठे मामले को लेकर एकत्रित होकर मुरैना सिटी कोतवाली में करीब 1 सैकड़ा से अधिक ग्रामीणों के खिलाफ शून्य पर मामला दर्ज कराया गया था। उसके बाद नगरा थाने में एक सैंकड़ा ग्रामीणों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया था। जिसमे पुलिस ने एक वनकर्मी को गिरफ्तार कर लिया हैं।

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अब अमोलपुरा गांव में वनकर्मियों की गोली से ग्रामीण की हत्या के मामले में नया मोड़ आ गया है। अपने साथियों के बचाव में आज सभी वनकर्मी मैदान में कूद पड़े हैं। डीएफओ अमित निगम के नेतृत्व में सभी वनकर्मियों ने आज कलेक्ट्रेट में पहुंचकर अपने साथियों पर दर्ज मामले की जांच की मांग की है। और मुख्यमंत्री के नाम वन कर्मियों ने आज संयुक्त कलेक्टर संजीव जैन को ज्ञापन सौंपा है। वन्य प्राणी कर्मचारी संघ के संभागीय अध्यक्ष विमल शर्मा ने ज्ञापन में बताया है कि उनके साथियों पर झूठा मामला दर्ज कराया गया है। यह मामला राजनीतिक दबाव में कराया गया है। हमारे साथियों की किसी से कोई दुश्मनी नहीं हैं हर दिन की तरह उस दिन भी सुबह 5 बजे गस्ती पर गए थे। उसी दौरान उन्होंने अवैध रेत से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली का पीछा किया तो ट्रैक्टर चालक ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर अमोलपुरा गांव की तरफ भगा ले गया, जहां खेत मे ट्रैक्टर ट्रॉली फस गया।उसके बाद उसको खेत में वन विभाग के अमले ने पकड़ लिया था। वन कर्मी ट्रैक्टर ट्रॉली को जब्त कर थाने में सुपुर्द करने के लिए ला रहे थे। तभी अमोलपुरा के करीब एक सैकड़ा ग्रामीणों ने वन अमले को चारों तरफ से घेर लिया और उन पर हमला कर फायरिंग कर दी। इसी दौरान एक गोली महावीर सिंह तोमर को लग गई। गोली लगने के बाद मामले को बिगड़ता देख वन कर्मी अपनी सरकारी गाड़ी को खेतों में छोड़कर भाग गए। हमारे वन कर्मियों को सुरक्षा की दृष्टि से 12 बोर की बंदूक दी जाती है, जबकि युवक की मौत 315 बोर की बंदूक की गोली लगने से हुई है। अब यह किसकी गोली से लगी है, उसकी मजिस्ट्रियल जांच की जाए। अगर जांच नहीं की जाती है तो सभी वनकर्मी एकत्रित होकर अपने बस्ते, वर्दी व हथियार जमा कर आंदोलन करेंगे। वहीं इस पूरे मामले में डीएफओ अमित निकम का कहना है कि हमारे कर्मचारियों पर झूठा प्रकरण दर्ज नहीं होना चाहिए था। कलेक्टर साहब से मजिस्ट्रियल जांच की मांग की है। उन्होंने हमारी मांग मानने के लिए आश्वासन दिया है।