एमपी चुनाव : यहां मंत्री की साख दांव पर, चिर प्रतिद्वंद्वी रहे प्रत्याशी से बेटे का मुकाबला

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रायसेन।

चुनावी मैदान सज चुका है और कल मतदान होना है। लेकिन इससे पहले प्रदेश की कई विधानसभा सीटों पर मुकाबला रोचक दिखाई दे रहा है। जी हम बात कर रहे है  रायसेन जिले की सांची विधानसभा सीट की।जहां सालों से भाजपा का कब्जा है, लेकिन इस बार समीकरण कुछ बदले बदले से नजर आ रहे है, इसका कारण है भाजपा द्वारा वरिष्ठ नेता औऱ शिवराज सरकार में मंत्री गौरीशंकर शेजवार के बेटे मुदित शेजवार को मैदान में उतारना।उनका मुकाबला कांग्रेस के डॉ. प्रभुराम चौधरी से होने जा  रहा है।चौधरी शेजवार के चिर प्रतिद्वंद्वी रहे चुके है।दूसरा कारण है मुदित एक युवा चेहरा है। खास बात ये है कि अन्य दलों का यहां विशेष प्रभाव नही है। जिसके चलते सीधा मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच है।

सांची विधानसभा सीट पर सालों से भाजपा का कब्जा रहा है। 1957 में सांची विधानसभा में पहली बार चुनाव लड़ा गया। पिछले 13 विधानसभा चुनावों मे सांची से कांग्रेस 4 बार , बीजेपी 6 बार और 3 अन्य पार्टी के उम्मीदवार विजयी रहे। डॉ. शेजवार इसी विधान सभा सीट से भाजपा से नौ बार विधान सभा चुनाव लड़ चुके हैं। इसमें से सात बार जीते हैं और दो बार हारे हैं। नेता प्रतिपक्ष से लेकर भाजपा की हर सरकार में वे मंत्री रहे हैं। लेकिन इस बार उनके बेटे मुदित मैदान में हैं। पिता की इसी राजनीतिक विरासत के आधार पर उच्च शिक्षित मुदित शेजवार जनता के बीच पहुंच रहे है। हालांकि वे लोकसभा चुनाव में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के रिटर्निंग ऑफिसर रह चुके हैं। वही सालों से इस सीट पर नजर जमाए बैठी कांग्रेस ने इस बार मंत्री शेजवार के प्रतिद्वंदी रहे वरिष्ठ नेता डॉ. प्रभुराम चौधरी को उतारा है। चौधरी पूर्व में डॉ. शेजवार के खिलाफ भी चुनाव लड़ते रहे हैं। चौधरी को डॉ. शेजवार का प्रमुख प्रतिद्वंद्वी माना जाता रहा है। मुदित के लिए उनके पिता वनमंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार चुनाव प्रबंधन संभाला वहीं प्रभुराम चौधरी का मैनेजमेंट उनके करीबी समर्थकों ने देखा।

इन मुद्दों को लेकर पहुंचे जनता के बीच

 मुदित एक  युवा चेहरा हैं और प्रचार के दौरान उन्होंने युवाओं से शिक्षा से जुड़े बड़े वादे किए है। उनके साथ उनके उच्च शिक्षित कई मित्र भी चुनावी मैदान में दिखाई दिए। लेकिन इन सब के बीच पिता और मंत्री शेजवार को लेकर क्षेत्र में विरोध भी बढ़ा है। इसी के चलते पार्टी द्वारा उनका टिकट काटा गया है। क्षेत्र के लोगों मे विकास ना होने और अधूरे वादों को लेकर आक्रोश है।जिसका खामियाजा मुदित को भी भुगतना पड़ सकता है।  वहीं कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. प्रभुराम चौधरी मंत्री गौरीशंकर के सालों से प्रतिद्वंदी रहे है और सालों से क्षेत्र में पकड़ बनाए हुए है, उनकी जीत के लिए क्षेत्रीय नेताओं ने पूरी ताकत लगाई, वहीं उनके बेटे अनुराग के साथ विदेश में पढ़े कई मित्र भी यहां जनसंपर्क के दौरान पहुंचे। इन्होंने कांग्रेस की नीतियों के साथ डॉ. चौधरी के कार्यकाल के दौरान मिली सौगातों को जनता के बीच रखकर एक अवसर देने की बात कही। विकास को लेकर भाजपा के मुद्दों को भी जमकर जनता के बीच भुनाया है।  ऐसे में मुकाबला बड़ा रोचक हो चला है। एक तरफ मंत्री की साख दांव पर लगी है वही दूसरी तरफ कांग्रेस सीट को हथियाने एडी से चोटी तक का दांव लगा चुकी है। हालांकि जीत किसकी होगी ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

आंकड़ों पर एक नजर

सांची विधानसभा रायसेन जिले की एक सीट SC वर्ग की सीट है। यह सीट लोकसभा क्षेत्र के विदिशा के अंतर्गत आती है।1957 में सांची विधानसभा में पहली बार चुनाव लड़ा गया। पिछले 13 विधानसभा चुनावों मे सांची से कांग्रेस 4 बार , बीजेपी 6 बार और 3 अन्य पार्टी के उम्मीदवार विजयी रहे। सांची विधानसभा की कुल आबादी 351077 लाख है। इसमें से कुल आबादी में 88 फीसदी लोग हिंदू है और 11 प्रतिशत लोग मुस्लिम हैं। विधानसभा की कुल आबादी का 80 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण है और 20 फीसदी हिस्सा शहरी है। विधानसभा की साक्षरता दर 75 प्रतिशत है। 2018 के विधानसभा चुनाव में 232631 लाख मतदाता वोटिंग करेंगे। 2013 में बीजेपी को इसी सीट पर 54.11 फीसदी और कांग्रेस को 40.83 फीसदी मत मिले थे।