रायसेन| मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के नूरगंज गांव में दूषित पानी पीने से चार लोगों की मौत हो चुकी है, वही कई लोग अब भी बिमारी की चपेट में हैं| मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और क्षेत्रीय विधायक सुरेंद्र पटवा पीडित परिजनों से मिलने पहुंचे। उन्होंने इस मामले में प्रशासन और शासन पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए जमकर कोसा| 

शिवराज ने कहा दूषित पेयजल से हुई लोगों की मृत्यु प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। प्राइवेट इलाज नहीं कर सकते और प्रशासन इलाज नहीं करवा सकता है, यह अमानवीयता है। 4 दिन में 4 लोगों की मृत्यु होना, पूरा गांव डरा हुआ है। दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हुई,तो आंदोलन होगा। उन्होंने कहा कि नूरगंज में दो महीने में बीमारी से 11 मौतें हुई है।   

मृतकों के परिवार को सहायता राशि दे सरकार 

शिवराज सिंह चौहान सुबह नूरगंज गांव पहुंचकर पीडित परिजनों से मिले और बातचीत की। उन्होंने दावा करते हुए कहा प्रशासन की लापरवाही के चलते दूषित पेयजल पीने से 2 माह में 11 नागरिकों की मौत हो गई। 24X7 डॉक्टर की व्यवस्था हो। जिम्मेदार व्यक्ति को दंडित किया जाए और जब तक पाइपलाइन पूरी तरह से ठीक नहीं हो जाती, तब तक टैंकर से स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जाए।  अभी भी 80 लोग बीमार हैं और सरकार अब भी सो रही है|  हमारी सरकार के समय कोई बड़ी बीमारी आती थी, तो हम प्राइवेट अस्पतालों से बात करते थे और उनसे कहते थे कि इलाज में कोई कमी मत रखना, पैसे सरकार चुकायेगी। सरकार बीमारों को इलाज के लिए 50 हजार और जिनकी मृत्यु हुई है, उनके परिजनों को 4 लाख रुपया प्रदान करे। 

प्रभारी मंत्री से की फोन पर बात 

मीडिया से चर्चा करते हुए पूर्व सीएम ने कहा मैंने आज जो हालत देखे है, उससे मन दु:खी है। यह अमानवीय है कि प्राइवेट अस्पताल में ग्रामीण पहुंच गये, तो उन्हें भगा दिया। सरकार प्राइवेट अस्पतालों को पैसे देकर कह सकती थी कि यदि बीमार आयें तो उनका इलाज करो।  गांव में पीड़ित परिवार से मिलने के बाद शिवराज सिंह ने प्रभारी मंत्री हर्ष यादव को फोन से बात की। उन्होंने प्रभारी मंत्री को बताया कि गांव की हालत बेहद खराब है। यहां पीने के पानी के लिए अतिरिक्त टैंकर उपलब्ध कराएं जाएं। 24 घंटे डॉक्टर की ड्यूटी गांव में लगाई जाई और लोगों की आर्थिक मदद की व्यवस्था की जाए।  अभी भी नूरगंज गांव में 80 लोग बीमार हैं। उनके इलाज की उचित व्यवस्था नहीं है और जब प्रशासन और गांव भी कह रहा है कि दूषित पानी के कारण उल्टी दस्त की ये जानलेवा बीमारी आई है, तो सरकार क्यों नहीं जाग रही है। अगर तत्काल कदम न उठाये गये, तो जो बीमार हैं, उनका क्या होगा?