इस दिवाली कुम्हारों को मिला बड़ा तोहफा, रीवा कलेक्टर ने जारी किए ये निर्देश

रीवा के कलेक्टर मनोज पुष्प ने सभी शहरवासियों से विशेष अपील की है कि, वो मिट्टी से बनाए गए दियों का ही उपयोग करें ताकि दिन-रात एक करने वाले कुम्हारों का त्यौहार भी अच्छे से मना सके। 

रीवा, डेस्क रिपोर्ट | देशभर में दिवाली को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है। लोग अपने घरों की साफ-सफाई, खरीदारी करने में लगें हुए हैं। बता दें कि दिवाली पर मिट्टी को तरह-तरह के सांचे में उतार कर उसे एक नया रुप देने वाले कुम्हार भी तरह-तरह के दिए, मिट्टी के खिलौने, आदि बनाने में जुटे हुए हैं। दीपावली दीपों का त्योहार है इस दिन सभी जगह लोग अपने घरों को दिए जलाकर रोशन करते हैं। इस दिन लक्ष्मी गणेश की पूजा भी की जाती है, जिसके बाद मिट्टी के बनाए बर्तन में प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। साथ ही, पूरे घर को दिए से सजा दिया जाता है। लोग जमकर पटाखें फोड़ते हैं। एक-दूसरे को मीठा खिलाकर बधाईयां देते हैं।

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इसी कड़ी में रीवा के कलेक्टर मनोज पुष्प ने दिवाली के पर्व पर कुम्हारों को बड़ा तोहफा दिया है। जिससे उनके चेहरे पर खुशी और उत्साह देखने को मिला है। दरअसल, कलेक्टर ने बताया कि नवरात्रि से लेकर दीपावली और देव प्रबोधनी एकादशी तक त्योहारों में मिट्टी से बने दीपों का उपयोग किया जाता है। वहीं, दिवाली की जगमगाहट भी मिट्टी के दीपकों से होती है। माटी से बने दीपक हमारे घर को रोशनी से जगमग करते है। साथ ही, गरीब परिवार की आजीविका का साधन भी बनते हैं। जिससे उनके घर में दीपाली मनती है।

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जिसे मध्यनजर रखते हुए कलेक्टर ने सभी शहरवासियों से विशेष अपील की है कि, वो मिट्टी से बनाए गए दियों का ही उपयोग करें ताकि दिन-रात एक करने वाले कुम्हारों का त्यौहार भी अच्छे से मना सके। उनके घर भी बच्चे धूमधाम से इस त्योहार को मना सकें। साथ ही उन्होंने इस बात का ऐलान किया है कि, परंपरागत कुम्हारों का कहीं भी प्रवेश शुल्क व बैठकी नहीं लगेगी। उन्होंने नगर निगम, नगर पंचायत, ग्राम पंचायत, पुलिस और राजस्व अमले को सहयोग करने के भी निर्देश दिए है। निर्देश के विरुद्ध जाने पर कार्रवाई भी की जाएगी।

 

कलेक्टर ने इस दिवाली कुम्हारों को ढ़ेरों खुशियां दे दी है। दरअसल, कलेक्टर ने उनपर किसी भी तरह का टैक्स लगाने से वर्जित कर दिया है। बता दें कि इस आदेश का जिले के हर शहर से लेकर छोटे गांव, कस्बों में भी पालन किया जाएगा।जिससे स्थानीय वस्तुओं के उत्पाद एवं बिक्री को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, गरीबों को भी कमाने का अवसर प्राप्त होगा।

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