सात बार असफल होने के बाद इंदौर की सलोनी का हुआ वायुसेना में सिलेक्शन, जानिए असफलता से सफलता की कहानी

इंदौर (Indore) जिले की सलोनी शुक्ला (Saloni Shukla) में वर्दी का जुनून (Uniform passion) ऐसा था कि उसने 7 बार असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी। और आज आठवीं बार में सफलता की ऊंचाइयों (Heights of success) को छू लिया है। सलोनी शुक्ला वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर (Saloni Shukla Air Force Flying Officer) बनने जा रही है।

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इंदौर, डेस्क रिपोर्ट। कहते हैं अगर इरादों में जुनून (Passion in intent) हो तो कोई भी मुश्किल काम आसान हो जाती है। जिसके लिए अगर हमें बार-बार हार का सामना भी करना पड़े तो पीछे नहीं हटना चाहिए। ऐसा ही जुनून इंदौर (Indore) जिले की सलोनी शुक्ला (Saloni Shukla) में देखने को मिली। जिसे 7 बार नाकामियों का सामना करना पड़ा, लेकिन आखिरकार आज उसका भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) के लिए सलेक्शन हो गया है और वह अब फ्लाइंग ऑफिसर (Saloni Shukla Air Force Flying Officer) बनेगी।

8वीं बार में मिली सफलता

बता दें कि सलोनी शुक्ला (Saloni Shukla) के पिता इंदौर आकाशवाणी (Indore AIR) में इंजीनियर के पद पर पदस्थ है। सलोनी शुक्ला (Saloni Shukla) को 7 बार असफलता हाथ लगी, लेकिन उसने हार नहीं मानी और आठवें प्रयास में सफलता की ऊंचाइयों को छू लिया। सलोनी शुक्ला (Saloni Shukla) ने इंदौर के ही एक कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग (mechanical Engineering) की पढ़ाई की है। जिसका सिलेक्शन भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) में हुआ है। अब सलोनी (Saloni Shukla) वायुसेना (Air Force) की टेक्नीकल ब्रांच (Technical branch) में फ्लाइंग ऑफिसर (Flying officer) के पद पर पदस्थ होगी।

सफलता में परिवार का मिला सपोर्ट

सलोनी ने बताया कि उनकी मां रश्मि शुक्ला (Rashmi Shukla) केंद्रीय विद्यालय इंदौर (Kendriya Vidyalaya Indore) में क्रमांक एक में टीचर के पद पर पदस्थ है। वहीं से ही सलोनी (Saloni Shukla) ने अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की है। सलोनी (Saloni Shukla) ने कहा कि उसका बचपन से ही सेना में जाने का सपना रहा है। जिसके लिए माता-पिता ने पूरा सपोर्ट किया है। सलोनी (Saloni Shukla) ने कहा कि जब माता-पिता का ट्रांसफर 2009 में भुज हो गया तो वहां फौजी अफसरों से उसे बेहद प्रेरणा मिली। साथ ही उनके दादाजी रामकुमार शुक्ला उसे पहले से ही सेना में जाने के लिए प्रोत्साहित किया करते थे। जिसके बाद उसने दृढ़ निश्चय करते हुए सेना में जाने का लक्ष्य बना लिया।

मां-पापा ने कही ये बात

सलोनी की मां रश्मि शर्मा ने कहा कि यह पहला मौका नहीं है, जब इतनी खुशी मिली है। इससे पहले भी सलोनी यूथ हॉस्टल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (Youth Hostel Association of India) के तहत हिमालयन ट्रैकिंग कैंप में हिस्सा लेकर कई चोटियां चढ़ चुकी है। वहीं सलोनी (Saloni Shukla) के पिता संजय कुमार शुक्ला ने बताया कि सलोनी कई बार असफल भी हुई है, लेकिन उसने अपना लक्ष्य और आत्मविश्वास को कमजोर नहीं होने दिया। वह लगातार मेहनत करती रही, इसी का फल है कि आज वह सफलता की ऊंचाई पर है। सलोनी (Saloni Shukla) के पिता ने कहा कि आज मुझे गौरवान्वित महसूस हो रहा है।

‘वर्दी के जुनून ने हारने नहीं दिया’

सलोनी (Saloni Shukla) का ग्रेजुएशन 2018 में हुआ था। जिसके बाद उसने एसएसबी का एग्जाम देना शुरू कर दिया। जहां लिखित परीक्षा में वह हर बार सफल रही, लेकिन इंटरव्यू में उसे निराशा हाथ लगती थी। सलोनी (Saloni Shukla) ने कुछ समय मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब किया, लेकिन उसने सेना में जाने के लिए जॉब को भी छोड़ दिया और पूरी तरह से एग्जाम की तैयारी में लग गई। इस दौरान वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थी और साथ-साथ अपनी तैयारी भी कर रही थी। सलोनी ने बताया कि उसने कई बार सोचा कि अब मैं कुछ और कर लूं, लेकिन वर्दी का जुनून ऐसा था कि वह मुझे कभी हारने नहीं दे रहा था। इसी के चलते आज मैं अपने लक्ष्य को पा सकी हूं।

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