Sehore News : जमीन भी चली गई, मुआवजा भी न मिला, जानें पूरा मामला

Sehore Public Hearing News : मध्य प्रदेश के सीहोर जिले की श्यामपुर तहसील के ग्राम बिछिया के तकरीबन एक दर्जन से अधिक ग्रामीण वर्ष 2017 से शासकीय विभागों के चक्कर लगा रहे तमाम अर्जियां अधिकारियों को दे चुके है और कई चौखट पर नाक भी रगड़ ली है इसके बावजूद भी इन ग्रामीणों को न्याय नही मिल सका है, न्याय की आश में यह ग्रामीण आज भी दर-दर की ठोकर खाने को मजबूर है।

यह है मामला

दरअसल पूरा मामला इस प्रकार है कि वर्ष 2017 में इन ग्रामीणों की कृषि भूमि का अधिग्रहण रेल विभाग ने किया था इस अधिग्रहित भूमि के मुवावजे को लेकर बिछिया ग्राम के एक दर्जन से अधिक किसान आज भी भटक रहे है। उन्होंने जनसुनवाई,तहसीलदार ,sdm ,कलेक्टर से लेकर कमिश्नर तक को दर्जनों आवेदन दे चुके है पर नतीजा वही ढाक के तीन पात, उधर रेल विभाग ने अधिग्रहित जमीन पर अपना कार्य भी शरू कर दिया।

ग्रामीणों ने लगाए आरोप

बिछिया ग्राम के ये किसान फिर कलेक्टर कार्यालय जनसुनवाई में पहुँचे। इन ग्रामीणों का आरोप है कि हमारी जमीन तो अधिग्रहित कर ली पर जो मुआवजा 7 दिनों में देना था वो अभी तक नही मिला, जिनको मुआवजा मिला है वो भी आधा अधूरा है, कुछ ग्रामीणों का तो नाम तक नही है मुआवजा लिस्ट में, ग्रामीणों का कहना है कि अगर शीघ्र ही मामले को लेकर प्रसाशन गंभीर नही हुआ, तो हमारे सामने आंदोलन करने के अलावा कोई रास्ता नही बचेगा।
सीहोर से अनुराग शर्मा की रिपोर्ट


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Amit Sengar

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मुझे अपने आप पर गर्व है कि में एक पत्रकार हूँ। क्योंकि पत्रकार होना अपने आप में कलाकार, चिंतक, लेखक या जन-हित में काम करने वाले वकील जैसा होता है। पत्रकार कोई कारोबारी, व्यापारी या राजनेता नहीं होता है वह व्यापक जनता की भलाई के सरोकारों से संचालित होता है। वहीं हेनरी ल्यूस ने कहा है कि “मैं जर्नलिस्ट बना ताकि दुनिया के दिल के अधिक करीब रहूं।”

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