इस सीट पर BJP ने सांसद का टिकट काट नए पर लगाया दांव, कांग्रेस कड़ी टक्कर देने को तैयार

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उज्जैन।

देश में चल रहा लोकसभा चुनाव अब अपने अंतिम दौर में है और सभी दलों ने इसमें अधिकतम हासिल करने के लिए जोर लगाना शुरू कर दिया है। इसी के तहत कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा सोमवार को मध्य प्रदेश के दौरे पर रहेंगी। इस दौरान वह उज्जैन में महाकाल के दर्शन कर वोटरों को साधने की कोशिश करेंगी।लेकिन इससे पहले आइए हम जानते है धर्मनगरी उज्जैन लोकसभा सीट के बारे में। सालों से यहां बीजेपी का कब्जा रहा है।वर्तमान में यहां से प्रो.चिंतामणि मालवीय सांसद हैं, लेकिन इस बार पार्टी ने उनका टिकट काट पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह के करीबी अनिल फिरोजिया को तो कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह की पहली पसंद बाबूलाल मालवीय को मैदान में उतारा है।

        उज्जैन लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। उज्जैन लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 7 सीटें आती हैं, जिसमें 4 पर कांग्रेस और 3 पर बीजेपी का कब्जा है।बीजेपी को यहां 7 चुनावों में जीत मिली है तो कांग्रेस को सिर्फ 4 बार ही यहां पर जीत हासिल करने में कामयाब रही है। पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने अपनी जनआशीर्वाद यात्रा की शुरुआत यहीं से की थी। वहीं कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंच से शिप्रा की बदहाली का मुद्दा उठाया था। महाकाल को पत्र लिख प्रदेश में सत्ता परिवर्तन की कामना करने वाले कमलनाथ मुख्यमंत्री बन गए। अब लोकसभा चुनाव दोनों दलों के लिए फिर से प्रतिष्ठा और चुनौती का विषय बन गया है।इसी के चलते एक बार फिर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी मध्यप्रदेश के दौरे पर है। यहां जीत के लिए प्रियंका आज महाकाल मंदिर भी जाएगी। विधानसभा चुनाव में निर्दलीय लड़ने वाले प्रत्याशी भी फिर कांग्रेस में लौट आए हैं, इसलिए पार्टी के नेता दावा कर रहे हैं कि उज्जैन लोकसभा सीट पर उनकी जीत निश्चित है। वही दूसरी ओर भाजपा एक बार फिर मोदी लहर के भरोसे है। मगर जातीय समीकरण और टिकट बंटवारे के बाद बढ़ी गुटबाजी भाजपा के लिए चुनौती है। 

वैसे उज्जैन-आलोट संसदीय सीट पर जातिगत समीकरण बहुत कम चले हैं। कांग्रेस ने इस सीट से 1971 में बलाई समाज के बापूलाल मालवीय और 1996 में सिद्धनाथ परिहार काे प्रत्याशी बनाया लेकिन दोनों ही हार गए। वहीं भाजपा ने 2014 में पहली बार यह फार्मूला अपनाया तो इसी जाति के प्रो.चिंतामणि मालवीय चुनाव जीत गए थे। अब 48 साल बाद इस सीट पर पुन: मालवीय व खटिक समाज के प्रत्याशी मैदान में हैं। इस चुनाव में इन्हीं जाति से कांग्रेस से बाबूलाल मालवीय (बलाई) तो भाजपा से अनिल फिरोजिया (खटिक) प्रत्याशी हैं।सीट का इतिहास बताता है कि यहां जातिगत फैक्टर से नहीं बल्कि लहर, मुद्दों व व्यक्तिगत छवि से सांसद चुने जाते रहे हैं। इसलिए कि 1967 में सीट के आरक्षित होने के बाद से 2014 तक के 13 चुनावों में कम जनसंख्या वाली पासी, खटिक व कोली जाति के प्रत्याशियों ने बलाई और रविदास बाहुल्य जाति के प्रत्याशियों को एक-दो नहीं पांच बार मात दी हैं। 

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