इस बैंक के खाता धारक हो जाएं सावधान क्योंकि RBI ने कर दिया लाइसेंस सस्पेंड, ऐसी स्थिति में क्या किया जाए

भारतीय रिजर्व बैंक ने कर्नाटक के दावणगेरे में स्थित मिल्थ को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड का लाइसेंस रद्द कर दिया है। इसके पीछे बताया जा रहा है कि सहकारी बैंक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं है और यह अपने मौजूदा कस्टमर्स की राशि चुकाने की स्थिति में भी नहीं है। जिसे कारण आरबीआई ने उसका लाइसेंस रद्द किया है।

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। भारतीय रिजर्व बैंक ने कर्नाटक के दावणगेरे में स्थित मिल्थ को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड का लाइसेंस रद्द कर दिया है। इसके पीछे बताया जा रहा है कि सहकारी बैंक के पास पर्याप्त पूंजी नहीं है और यह अपने मौजूदा कस्टमर्स की राशि चुकाने की स्थिति में भी नहीं है। जिसे कारण आरबीआई ने उसका लाइसेंस रद्द किया है।

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18 जून 2022 को रिजर्व बैंक ने अपने बयान में कहा कि इसके बाद वह बैंक बैंकिंग बिजनेस नहीं कर पाएगा। इसके लिए आरबीआई ने एक प्रेस विज्ञप्ति भी जारी किया है, जिसमें उसने कहा है कि कर्नाटक के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार में बैंक को बंद करने के लिए एक अनुरोध जारी किया गया था। जिसको मान्य करते हुए अब आरबीआईएस बैंक को बंद कर रही है।

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इस बयान में आगे कहा गया कि बैंक के पास अभी पर्याप्त पूंजी और कमाई का कोई भी संभावना नहीं है, इसलिए केंद्रीय मंत्री ने मिल्थ को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड को बैंक नियमन अधिनियम 1949 की धारा 56 के प्रावधानों का अनुपालन न कर पाने के एवज में बैंक का लाइसेंस सस्पेंड कर रही है।

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बैंक का लाइसेंस सस्पेंड करने की घोषणा करते हुए रिजर्व बैंक ने बताया कि बैंक द्वारा जमा कराए गए ब्योरे के अनुसार जमा कर्ताओं के डिपॉजिट इंश्योरेंस एवं क्रेडिट गारंटी निगम के जरिए पूरी जमा राशि मिलेगी। लिक्विडेटर नियुक्ति होने की स्थिति में प्रदेश जमाकर्ता को DICGC में बीमा का दावा करना होगा। जिसके बाद वह पैसे उन्हें मिलेंगे और इसकी सीमा अधिकतम ₹500000 तक है।

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आरबीआई ने कहा कि यदि बैंक को हम बिजनेस जारी करने के लिए अनुमति देते हैं, तो इससे जनहित पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। 18 मई 2022 तक DICGC ने बैंक के सम्बंधित जमाकर्ताओं से प्राप्त अनुरोध के आधार पर एक्ट 1961 की धारा 18A के प्रावधानों के तहत कुल जमा राशि ₹10.38 करोड़ का भुगतान कर चुका है।