मल्लिकार्जुन खड़गे I.N.D.I.A के अध्यक्ष, नीतीश कुमार ने पद ठुकराया, घोषणा होना शेष

Mallikarjun Kharge Chairperson of I.N.D.I.A.

I.N.D.I.A,Indian National Developmental Inclusive Alliance : विपक्षी गठबंधन के समूह इंडिया (I.N.D.I.A) ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को गठबंधन का चेयरपर्सन चुन लिया है, ये फैसला आज शनिवार को हुई गठबंधन के नेताओं की बैठक में लिया गया, बताया जा रहा है कि पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव आया था लेकिन उन्होंने इस पद  को अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद खड़गे के नाम पर सहमति बनी, हालाँकि अभी इसकी अधिकारिक घोषणा होना शेष है।

बैठक में शामिल हुए गठबंधन के 14 पार्टी के नेता 

शनिवार को इंडी अलायंस की पांचवी बैठक हुई, वर्चुअल  बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, एनसीपी चीफ शरद पवार, बिहार के सीएम नीतीश कुमार, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता सीताराम येचुरी, तमिलनाडु के सीएम और डीएमके चीफ स्टालिन सहित कुल 14 दलों के नेता शामिल हुए.बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शामिल नहीं हुई और न उनकी तरफ से कोई और प्रतिनिधि शामिल हुआ, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, उद्धव ठाकरे भी बैठक में शामिल नहीं हुए।

नीतीश कुमार ने पद लेने से किया इंकार 

जानकार सूत्रों के मुताबिक इंडी अलायंस की इस वर्चुअल बैठक में चेयरपर्सन बनाने का प्रस्ताव रखा गया, पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम सामने आया लेकिन उन्होंने इस पद को स्वीकार करने से इंकार कर दिया उन्होंने कहा कि मुझे किसी पद की लालसा नहीं है उसके बाद चेयरपर्सन का पद कांग्रेस नेता को दिए जाने पर चर्चा हुई, फिर बैठक में शामिल सभी दलों के नेताओं ने मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम पर सहमति जता दी।

खड़गे के नाम पर बनी सहमति, आधिकारिक घोषणा होना शेष  

अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे I.N.D.I.A के चेयरपर्सन यानि अध्यक्ष चुन लिए गए हैं, हालाँकि इसकी आधिकारिक घोषणा गठबंधन के बाकी दलों के नेताओं से चर्चा के बाद ही की जाएगी , बैठक में लोकसभा चुनाव में सीट शेयरिंग पर थोड़ी बहुत चर्चा हुई लेकिन सभी दलों की उपस्थिति नहीं होने के कारण कुछ भी तय नहीं हो पाया।


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Atul Saxena

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पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं ....

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