ऑक्सीजन एक्सप्रेस के लिए रेलवे ने बनाया ग्रीन कॉरिडोर, शुक्रवार से शुरू होगी ढुलाई

कोरोना काल में ऑक्सीजन संकट दूर करने के लिए ऑक्सीजन एक्सप्रेस बोकारो के लिए रवाना हो गई है। जिसके लिए रेलवे ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया है। जिसकी जानकारी रेल मंत्री ने ट्वीट कर दी है।

नई दिल्ली, डेस्क रिपोर्ट। कोरोना काल में गहराते ऑक्सीजन (Oxygen) संकट से निपटने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से अस्पतालों में ऑक्सीजन भेजे जाने की कवायद की जा रही है। इसी कड़ी में बोकारो स्टील प्लांट से लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन सप्लाई (Liquid Medical Oxygen Supply) की जानी है। रेल मंत्री पीयूष गोयल (Railway Minister Piyush Goyal) ने ऑक्सीजन सप्लाई के संबंध में ट्वीट कर लिखा कि उत्तर प्रदेश में ऑक्सीजन आपूर्ति हेतु लखनऊ से खाली टैंकर बोकारो स्थित स्टील प्लांट के लिए रवाना हुए हैं।

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रेल मंत्री पीयूष गोयल ने लिखा कि ऑक्सीजन एक्सप्रेस (Oxygen Express) वाराणसी से आगे निकल चुकी है। ट्रेन तेज गति से चले, इसके लिए रास्ते में ग्रीन कोरिडोर बनाया गया है, ताकि बिना किसी रेड सिग्नल के यह ट्रेन जल्द से जल्द अपने गंतव्य तक पहुंच सके।

शुक्रवार से शुरू हो सकती है सप्लाई
इससे पहले गुरुवार को बोकारो के डीजल शेड स्थित रैक प्वाइंट धंसने की खबर सामने आई। इस कारण ऑक्सीजन की खेप महाराष्ट्र के लिए रवाना नहीं की जा सकी। शेड इंचार्ज का कहना है कि दो दिन बाद ही दूसरे राज्यों में ऑक्सीजन की खेप भेजी जा सकती है। झारखंड के बोकारो स्टील प्लांट के डीजल शेड स्थित रैक प्वाइंट धंसने से ऑक्सीजन की खेप महाराष्ट्र के लिए रवाना नहीं की जा सकी। हालांकि, रैक प्वाइंट के क्षतिग्रस्त पार्ट्स की ढलाई कर दी गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि शुक्रवार से सप्लाई शुरू हो सकती है।

मध्यप्रदेश सहित 4 राज्यों को होगी सप्लाई
बोकारो में तीन कंपनियों को ऑक्सीजन बनाने के लिए लाइसेंस प्राप्त है। अकेले बोकारो स्टील प्लांट हर दिन 90 टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन देने को तैयार है। बोकारो से ऑक्सीजन मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र को भी भेजी जा रही है। यह आपूर्ति सेल की पार्टनर कंपनी आइनोक्स एयर प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कर रही है।

ऑक्सीजन सप्लाई के लिए बनेगा ग्रीन कॉरिडोर
बोकारो से ऑक्सीजन भेजने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया जाएगा। ट्रेन जब यूपी से ऑक्सीजन लेने के लिए बोकारो भेजी गई थी तब भी ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था। 270 किलोमीटर की दूरी 4 घंटे 20 मिनट में तय हो गई थी। लंबी दूरी में सड़क परिवहन की तुलना में ट्रेनों के माध्यम से ऑक्सीजन की ढुलाई ज्यादा तेज है। ट्रेनें लगातार चल सकती है जबकि ट्रक से यह काफी मुश्किल है।