Gita Updesh के अनुसार इन 6 गुणों से होती है इंसान की पहचान, जीवनभर रहते हैं खुश

आज के आर्टिकल में हम आपको गीता उपदेश में बताई गई कुछ बातों को बताएंगे, जिन्हें अपनाकर आप भी अपने जीवन को अच्छा बना सकते हैं। आइए जानते हैं विस्तार से...

Gita Updesh : कुरुक्षेत्र की लड़ाई सभी को याद है। दरअसल, यह दो परिवारों के बीच की लड़ी गई थी, जब कौरव और पांडव धर्म युद्ध कर रहे थे, इस दौरान बड़े-बड़े शूरवीर योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए, लेकिन युद्ध प्रारंभ होने से पहले भगवान श्री कृष्ण द्वारा गीता का उपदेश भी दिया गया था जोकि कुल 45 मिनट का था। इस दौरान भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन के मन में चल रही दुविधाओं को खत्म कर दिया। दरअसल, अर्जुन अपनों को युद्ध के मैदान में शस्त्र के साथ देखकर काफी ज्यादा दुखी हो गए थे और उन्होंने युद्ध न करने का मन बनाया और अपनी इस बात को माधव के सामने रखा। जिसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को यह बताया कि वह एक क्षत्रिय है, इसलिए यह उनका धर्म है कि वह युद्ध करें और अपने राज्य को सुरक्षित रखते हुए एक धर्मवीर राजा प्रदान करें। साथ ही, उन्होंने यह भी समझाया कि इंसान को अपने कर्म करते जाना चाहिए, वह भी बिना किसी परिणाम की इच्छा रखते हुए। इसके बाद उन्होंने विश्व रूप का दर्शन कराया। उन्होंने यह बताया कि इस पूरे सृष्टि की रचना उन्होंने की है और इसके पालनहार करता स्वयं वह खुद है। इसलिए मन में चल रही दुविधाओं को दरकिनार करते हुए युद्ध करो क्योंकि आत्मा अजर और अमर होती है। जैसे कोई भी पुराने वस्त्र को त्याग कर इंसान नया वस्त्र धारण करता है, ठीक वैसे ही कोई भी आत्मा एक शरीर को छोड़कर दूसरी जीव में प्रवेश कर जाती है। इसलिए मोह माया को त्यागते हुए अपना धर्म निभाओ। जिसके बाद यह युद्ध लड़ा गया, जिसमें कौरवों को हार मिली और पांडवों की जीत हुई। तो चलिए आज के आर्टिकल में हम आपको गीता उपदेश में बताई गई कुछ बातों को बताएंगे, जिन्हें अपनाकर आप भी अपने जीवन को अच्छा बना सकते हैं। आइए जानते हैं विस्तार से…

Gita Updesh के अनुसार इन 6 गुणों से होती है इंसान की पहचान, जीवनभर रहते हैं खुश

गीता उपदेश के अनुसार, शरीर में कोई सुन्दरता नहीं है। सुन्दर व्यक्ति के कर्म, उसके विचार, उसकी वाणी, उसका व्यवहार, उसके संस्कार और उसका चरित्र होते है।

जानें अर्थ

गीता उपदेश के अनुसार, शरीर की सुंदरता बिल्कुल भी स्थाई नहीं होती, बल्कि यह समय के साथ ढलती चली जाती है और एक न एक दिन इसका ढलना सुनिश्चित होता है, लेकिन आत्मा अजर और अमर होती है। वहीं, असली सुंदरता की पहचान व्यक्ति के कर्म, विचार, वाणी, व्यवहार, चरित्र और संस्कारों से होता है। अगर व्यक्ति अच्छे कर्म करता है, किसी भी दूसरे व्यक्ति के प्रति अपने विचार को सकारात्मक रहता है, सच्ची वाणी बोलता है, सबसे अच्छा व्यवहार करता है, उसका चरित्र साफ है और उसके संस्कार श्रेष्ठ है, तो वह बहुत ही सुंदर व्यक्ति है। उसे समाज में मान और प्रतिष्ठा मिलती है। ऐसे लोगों को हमेशा याद किया जाता है। किसी भी नेक काम में उनका नाम लिया जाता है। इसलिए गीता के इस उपदेश को अपनाते हुए आप भी इन गुणों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं, इससे आप एक अच्छा व्यक्तित्व बन पाएंगे।

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Sanjucta Pandit

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मैं संयुक्ता पंडित वर्ष 2022 से MP Breaking में बतौर सीनियर कंटेंट राइटर काम कर रही हूँ। डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन और बीए की पढ़ाई करने के बाद से ही मुझे पत्रकार बनना था। जिसके लिए मैं लगातार मध्य प्रदेश की ऑनलाइन वेब साइट्स लाइव इंडिया, VIP News Channel, Khabar Bharat में काम किया है। पत्रकारिता लोकतंत्र का अघोषित चौथा स्तंभ माना जाता है। जिसका मुख्य काम है लोगों की बात को सरकार तक पहुंचाना। इसलिए मैं पिछले 5 सालों से इस क्षेत्र में कार्य कर रही हुं।

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