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क्या आपने भी पहन रखा है धार्मिक लॉकेट, याद रखें ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी

Written by:Atul Saxena
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धर्म, डेस्क रिपोर्ट। अक्सर लोग गले में भगवान के लॉकेट (Locket) पहनना पसंद करते हैं।  कुछ लोग भगवान के स्वरूप के लॉकेट पहनते हैं तो कुछ धार्मिक चिन्हों के लॉकेट गले में धारण करते हैं। इन लॉकेट्स को पहनने के पीछे कुछ लोगों के लिए धार्मिक कारण होते हैं तो कुछ लोग सिर्फ फैशन के नाम पर ये लॉकेट धारण करते हैं। जो लोग फैशन के नाम पर धार्मिक चिन्ह या फिर भगवानों के लॉकेट पहनते हैं उन्हें ये जान लेना चाहिए कि इन लॉकेट्स को पहनने के भी कुछ नियम होते हैं, जिनकी अनदेखी से मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अगर धर्म से जुड़े किसी भी प्रतीक का लॉकेट धारण किया है तो कुछ बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए।

ये बात रखें याद

भगवान की तस्वीर या चेहरे की बनावट वाला लॉकेट पहनते समय ये ध्यान रखना जरूरी है कि आप पूरी तरह स्वच्छ हों। शरीर पर किसी तरह की गंदगी न रहे, लॉकेट पर गंदे हाथ भी न लगाएं। लॉकेट पहनने के बावजूद आप स्वच्छ नहीं रहते हैं तो इसका आपके जीवन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

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भगवानों का लॉकेट पहनते समय आप क्या खाते हैं क्या नहीं, इसका ध्यान रखना भी जरूरी है। जो लोग नॉनवेज खाते हैं उन्हें कब लॉकेट पहनना चाहिए कब नहीं ये ध्यान रखने की बात है। माना जाता है कि जो लोग नॉनवेज खाते हैं उन्हें खाना खाते समय लॉकेट उतार देना चाहिए। अगले दिन नहा धो कर ही लॉकेट धारण करना चाहिए।

यंत्र वाले लॉकेट

भगवानों के ही नहीं लेकिन आप चाहें तो यंत्र वाले लॉकेट धारण कर सकते हैं। किसी भी भगवान के यंत्र वाले लॉकेट धारण करने से पहले ज्योतिषियों की सलाह ले लेना चाहिए। सही यंत्र वाला लॉकेट धारण करने से पॉजिटिव एनर्जी मिलती है और कुंडली से जुड़े कई दोष दूर होते हैं।

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Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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