Pitru Paksha 2023: पितृ पक्ष में क्या है भोजन के पांच अंश का महत्व? ये हैं श्राद्ध की तिथियां

Atul Saxena
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Pitru Paksha 2023: पितृ यानि पूर्वज जिनके हम अंश हैं, उनकी विशेष पूजा और उनके तर्पण का पर्व या पक्ष जिसे पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष कहते हैं, इस महीने ने अंत में शुरू होगा, हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद यानि भादो महीने की पूर्णिमा तिथि से पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष की शुरुआत होती है और समापन अश्विन माह की अमावस्या तिथि को होता है, साल 2023 में पितृ पक्ष 29 सितंबर 2023 से शुरू होंगे और 14 अक्टूबर 2023 को समाप्त हो जायेंगे।

पितृ पक्ष ने पितरों के लिए होता है पिंड दान, तर्पण 

कहने को इसे श्राद्ध पक्ष कहते हैं, सामान्य समझ में पक्ष का अर्थ 15 दिन से होता है लेकिन श्राद्ध पक्ष में श्राद्ध 16 होते हैं ये पूर्णिमा से अमावस्या तक किये जाते हैं, श्राद्ध के इन 16 दिनों में शास्त्रों में वर्णित विधान के अनुसार पितरों (पित्रों)के निमित्त पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं।

मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष में पितृ आशीर्वाद देने पृथ्वी लोक पर आते हैं  

ऐसी मान्यता है कि पितृ पक्ष में यानि श्राद्ध पक्ष में हमारे पितर (पितृ) बैकुंठ धाम से पृथ्वी पर आकर हमें आशीर्वाद देते हैं, वे धरती पर पशु, पक्षियों के माध्यम से हमारे निकट आते हैं,  इसलिए इस दौरान कुछ पशु-पक्षियों को भोजन कराने का विधान है और उनके लिए भोजन के पांच अंश को निकालने का विधान शास्त्रों में बताया गया है।

इन पशु पक्षियों के लिए निकाले जाते हैं पांच भाग  

पितृ पक्ष में हम अपने पितृ के श्राद्ध के लिए उनकी तिथि पर जो भोजन तैयार करते हैं, उसे ब्राह्मण को खिलाने से पहले अलग-अलग पांच भागों में निकाला जाता है, इसके एक भाग को गाय के लिए दूसरे को कुत्ते के लिए, तीसरे भाग को चींटी के लिए  और चौथे भाग को देवताओं के लिए पत्ते पर या दोने में निकाला जाता है और पांचवे भाग को कौवे के लिए भूमि पर रख दिया जाता है, इन सभी को इनका भाग देते समय प्रार्थना की जाती है कि ये आकर भोजन ग्रहण करें और इससे हमारे पितृ प्रसन्न होकर हमें आशीर्वाद प्रदान करें।

पांच अंश भोजन का पंचतत्व से संबंध

श्राद्ध करते समय पितरों को अर्पित करने वाले भोजन के पांच अंश गाय, कुत्ता, चींटी, देवताओं  और कौवे के लिए निकाले जाते हैं, इसमें कुत्ता जल तत्त्व का प्रतीक माना जाता है, चींटी अग्नि तत्व का प्रतीक, कौवा वायु तत्व का प्रतीक, गाय पृथ्वी तत्व का प्रतीक और देवताओं को आकाश तत्व का प्रतीक माना गया है, इस तरह से जब हम भोजन का पांच अंश इस सभी के लिए निकालते हैं तो हम पंचतत्वों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं क्योंकि ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति का कारक इन्हीं पांच तत्वों का माना गया है।

पितृ पक्ष/श्राद्ध पक्ष में श्राद्ध की तिथियां

29 सितंबर 2023 – शुक्रवार – पूर्णिमा श्राद्ध
30 सितंबर 2023 – शनिवार – द्वितीया श्राद्ध
01 अक्टूबर 2023 – रविवार –  तृतीया श्राद्ध
02 अक्टूबर 2023 – सोमवार – चतुर्थी श्राद्ध
03 अक्टूबर 2023 – मंगलवार – पंचमी श्राद्ध
04 अक्टूबर 2023 – बुधवार – षष्ठी श्राद्ध
05 अक्टूबर 2023 – गुरुवार – सप्तमी श्राद्ध
06 अक्टूबर 2023 – शुक्रवार – अष्टमी श्राद्ध
07 अक्टूबर 2023 – शनिवार – नवमी श्राद्ध
08 अक्टूबर 2023 – रविवार – दशमी श्राद्ध
09 अक्टूबर 2023 – सोमवार – एकादशी श्राद्ध
11 अक्टूबर 2023 – बुधवार – द्वादशी श्राद्ध
12 अक्टूबर 2023 – गुरुवार – त्रयोदशी श्राद्ध
13 अक्टूबर 2023 – शुक्रवार – चतुर्दशी श्राद्ध
14 अक्टूबर 2023 – शनिवार – सर्व पितृ अमावस्या

Disclaimer –  ऊपर आलेख दी गई सूचनाएं  मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। एमपी ब्रेकिंग इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।


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पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं ....

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