इस दिन से शुरू हो रहे शारदीय नवरात्र, ये है पूजा विधि और कलश स्थापना तिथि

हिंदू धर्म में नवरात्रि (Navratri) का काफी ज्यादा महत्व माना जाता है। वैसे तो साल में चार नवरात्रि आते हैं, लेकिन उनमें से दो नवरात्रि काफी ज्यादा खास और महत्वपूर्ण मानी जाती है। अब इस साल की दूसरी नवरात्रि आने वाली है। इस नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) कहा जाता है।

Shardiya Navratri

धर्म, डेस्क रिपोर्ट। हिंदू धर्म में नवरात्रि (Navratri) का काफी ज्यादा महत्व माना जाता है। वैसे तो साल में चार नवरात्रि आते हैं, लेकिन उनमें से दो नवरात्रि काफी ज्यादा खास और महत्वपूर्ण मानी जाती है। अब इस साल की दूसरी नवरात्रि आने वाली है। इस नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) कहा जाता है। इस बार यह नवरात्रि 26 सितंबर 2022 से शुरू हो रही है जो 4 अक्टूबर को समाप्त होगी।

जैसा कि आप सभी जानते हैं नवरात्रि का पर्व देवी शक्ति मां दुर्गा को समर्पित होता है। ऐसे में नवरात्रि के 9 दिन मां के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। इतना ही नहीं शारदीय नवरात्रि में गरबा भी खेला जाता है। ये नवरात्री काफी हर्षोउल्लास के साथ मनाई जाती है। इसकी सबसे ज्यादा धूम मध्यप्रदेश और गुजरात में देखने को मिलती है।

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आपको बता दे, नवरात्रि के नौ दिन मां के अलग अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है साथ ही घरों में कलश स्थापना कर सप्तमी, अष्टमी और नवमी पर कन्या भोज भी करवाया जाता है। मान्यताओं के मुताबिक, नवरात्रि में भगवान श्रीराम ने रावण का वध करने के बाद सबसे पहले देवी की पूजा की थी। उसके बाद से अब तक ऐसी ही परंपरा चली आ रही हैं। आज हम आपको बताने जा रहे है किस तिथि पर नवरात्रि आ रही है और किस दिन किस माता की पूजा होगी। तो चलिए जानते है –

ये है नवरात्रि की तिथि –

  • सोमवार, 26 सितंबर 2022 के दिन मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना
  • मंगलवार, 27 सितंबर 2022 मां ब्रह्मचारिणी पूजा
  • बुधवार, 28 सितंबर 2022 मां चंद्रघण्टा पूजा
  • गुरुवार , 29 सितंबर 2022 मां कुष्माण्डा पूजा
  • शुक्रवार, 30 सितंबर 2022 मां स्कंदमाता पूजा
  • शनिवार, 1 अक्टूबर 2022 मां कात्यायनी पूजा
  • रविवार, 2 अक्टूबर 2022 मां कालरात्री पूजा
  • सोमवार, 3 अक्टूबर 2022 मां महागौपूजा, दुर्गा महाष्टमी
  • मंगलवार, 4 अक्टूबर 2022 मां सिद्धरात्री पूजा, दुर्गा महानवमी पूजा

पूजा विधि –

नवरात्रि के दिन सबसे पहले उठ कर स्नान कर साफ़ वस्त्र पहनना चाहिए। उसके बाद शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना की विधि करें। सबसे पहले कलश में गंगाजल भरे। उसके बाद मुख पर आम के पत्ते रखें। उसके बाद आपको लाल धागा या मोली कलश पर लपेटना होगी। फिर कलश पर एक श्रीफल को लाला चुंदरी में लपेट कर उसको आम के पत्ते के ऊपर पर रखे। उसके बाद आपको कलश को मिट्टी के बर्तन के पास रखना है उसके बाद उसके ऊपर जौके बीज बोएं, फिर उस पर हर दिन पानी छिड़के। साथ ही आप नौ दिनों तक मां की आराधना कर मन्त्रों का जाप करें।