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सरकार ने एमपी में भ्रष्टाचार की कोई कसर नही छोड़ी, शौचालय निर्माण में चल रहा 15,000 करोड़ का स्कैम

आगर-मालवा।

प्रदेश के कई जिले ऐसे है जिनकों कागजों पर तो ओडिएफ घोषित कर दिया गया है लेकिन सच्चाई उससे कोसो दूर है। लोग आज भी कई जिलों में खुले में शौच जाने को मजबूर है।कई जगहों पर गढ्डे खोद दिए गए है, तो जगह पर सीटे लगाकर जिले को ओडिएफ घोषित किया गया है।बीते दिनों ही मध्यप्रदेश के आगर-मालवा जिले को मुख्यमंत्री शिवराज द्वारा ओडिएफ घोषित किया गया था, लेकिन यहां के लोगों की माने तो अभियान के तहत बनाए जा रहे शौचालय अब शौच की जगह नहीं रहे बल्कि लकड़ी रखने वाली अलमारियों में तब्‍दील हो गए है, तो कही शौचालयों में उपले सूख रहे है।इससे अधिकारियों की पोल खुल गई है और स्‍वच्‍छ भारत मिशन के तहत बनाएं गए शौचालय पर भी सवाल खड़े होने लगे है।

शौचालय के नाम पर अधिकारियों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए है। कांग्रेस के गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीटर के माध्यम से  शिवराज सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि मध्य प्रदेश में सरकार ने भ्रष्टाचार की कोई कसर नहीं छोड़ी है- गाँवों को खुले शौचालय मुक्त तो घोषित कर दिया, लेकिन असल में ये शौचालय इस्तेमाल करने लायक नहीं है। इस सब मे क़रीब 15,000 करोड़ का स्कैम चल रहा है!


बता दे कि  बीते साल ही जिले को मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा 31 मई 2017 को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। यहां शौचालयों को निर्धारित मापदंड के अनुसार न बनाते हुए छोटे और अधूरे ही बना दिए गए है। कई जगह शौचालयों के नाम पर गड्ढों को अधुरा छोड़ दिया गया तो कहीं शौचालयो में शीट नहीं लगाई गई है, लेकिन निर्माण के लिए मिलने वाला पैसा बराबर अधिकारियों औऱ ठेकेदारों द्वारा निकाला गया है।कुल मिलाकर यहां बनाए गए शौचालयों में 83 लाख 29 हजार 500 रूपए की राशि खर्च की गई है, जिसमें से अधिकतर अधूरे है।


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