प्रभात झा ने किस पर किये प्रहार, तबाड़तोड़ ट्वीट से गरमाई सियासत

 भोपाल| अक्सर अपने तीखे बयानों से विरोधियों पर सीधा वार करने वाले भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य प्रभात झा के तबाड़तोड़ ट्वीट से पार्टी में हड़कंप मच गया है| उन्होंने लगातार कई ट्वीट कर इशारों ही इशारों में बड़ी बात कही है, लेकिन किसके लिए कही यह नहीं लिखा है| झा के इन ट्वीट से अटकलों का बाजार गर्म हो गया है| वहीं इन ट्वीट को लेकर हर कोई अलग मायने निकाल रहा है|  ख़ास बात ये है कि प्रभात झा ने इन सभी ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के अलावा मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और राष्ट्रीय सदस्यता प्रभारी शिवराज सिंह चौहान को भी टैग किया है| वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया पर भी निशाना साधा है| 

दरअसल, भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल के हटते ही राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने ट्विटर कई बातें लिखी हैं, जो कि सभी नसीहत जैसी है| ऐसा लगता है कि उन्होंने अलग अलग लोगों को निशाने पर लिया है| कुछ ट्वीट में उन्होंने परोक्ष रूप से रामलाल पर तंज कसते हुए कहा- ‘कुछ लोग इंसान होते हुए भी अपने को भगवान मानने लगते हैं। अच्छा व्यक्ति ‘संगठक’ वह है जो हर व्यक्ति को काम में जुटा ले। जो खुद भी काम नहीं करते और किसी को करने नहीं देते, वे लोग सदैव असफल होते हैं। इसलिए हमेशा अपने काम पर विश्वास रखें।’ झा ने रविवार को एक के बाद कई ट्वीट कर यह बात कही। झा के इस कथन को सियासी हलकों में रामलाल से जोड़कर देखा जा रहा है। 


जिम्मेदारी का मतलब 'मैं ही हूं' का भाव नहीं होना चाहिए 

प्रभात झा ने अपने एक ट्वीट में लिखा है कि किसी के सम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि कल यह आपके साथ भी हो सकता है| अच्छा ‘संगठक’ वही होता है जो हर व्यक्ति को काम में जुटा ले, एक अन्‍य ट्वीट में उन्‍होंने लिखा है कि जिम्मेदारी का मतलब 'मैं ही हूं' का भाव नहीं होना चाहिए| इसके साथ ही प्रभात झा ने यह भी लिखा है कि आप जो नहीं हैं, वैसा बनने के लिए कोशिश करें लेकिन नाटक नहीं| प्रभात झा ने इसके साथ ही लिखा है कि दूसरों को कष्ट देने वालों को जब खुद कष्ट होता है तो उसे अपनी गलती समझ आती है|

सिंधिया पर भी किया वार 

प्रभात झा ने अपने ट्वीट में कांग्रेस के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया पर भी हमला बोला है। उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया को टैग करते हुए उनके लिए भी कई बातें लिखी हैं।  प्रभात झा ने अपने ट्वीट पर लिखा- ज्योतिरादित्य सिंधिया जी हारने के बाद आपका मार्गदर्शन गले नहीं उतर रहा। राहुल गांधी जी की जो आज दुर्दशा हो रही है उसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया का कम हाथ या योगदान नहीं है। ज्योतिरादित्य जी अगर आज सरदार वल्लभभाई पटेल होते, तो आप कहां होते?|  झा ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ खुला हमला बोलते हैं। हाल ही में उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया की हार पर तंज कसते हुए कहा था कि, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपना जनाधार खो दिया है और करोड़ों की जमीन लेकर बैठे हैं और खुद का महाराजा कहते हैं। जिसके चलते प्रभात झा के ट्वीट को सिंधिया से जोड़कर भी देखा जा रहा है| 

प्रभात झा के ताबड़तोड़ ट्वीट 

-जाही विधि राखे राम, ताहि विधि रहिए" के भाव को समझकर अपना कार्य करना चाहिए।

- दायित्व" का मतलब "मैं ही हूं" का भाव नहीं होना चाहिए।

-आप जो नहीं हैं, उसे बनने के लिए प्रयास तो करें पर नाटक नहीं।

-कल क्या होगा, वह कोई नहीं जानता। पर आज हम क्या करें इसकी समझ तो हमें रखनी होगी। हमारे आज में ही कल छुपा हुआ है।

-किसी के सम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। कल आपके साथ भी हो सकता है।

-दूसरों को हार्दिक कष्ट देने वालों को जब खुद हार्दिक कष्ट होता है, तभी उसे अपनी गलती समझ में आती है।

-अच्छा व्यक्ति "संगठक" वह है जो हर व्यक्ति को काम मे जुटा ले।

 -"अपने काम पर विश्वास रखें"। वे लोग सदैव असफल होते हैं, जो खुद भी काम नहीं करते और किसी को करने नहीं देते।

-सरदार वल्लभभाई पटेल के अधूरे सपने को पूरा करने का दायित्व श्री @narendramodi जी ने अमित भाई शाह @AmitShah को सौंपा है। अमित भाई आप गृहमंत्री के रूप में उन समस्याओं का निदान अवश्य करेंगे, जो हर भारतीय का मन चाहता है।

-ज्योतिरादित्य @JM_Scindia जी अगर आज सरदार वल्लभभाई पटेल होते, तो आप कहां होते?

 -ज्योतिरादित्य सिंधिया @JM_Scindia जी हारने के बाद आपका मार्गदर्शन गले नहीं उतर रहा। @RahulGandhi जी की जो आज दुर्दशा हो रही है उसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया का कम हाथ या योगदान नहीं है।

 -सामान्य तौर पर आप जब किसी निर्णायक पद पर आएं तो राजा हरिश्चंद्र के चरित्र को अवश्य अपने सामने रखें।

-"आप" और "हम", "मैं" और "तू" में अंतर है। 

-एक में विनम्रता है तो दूसरे में अपनत्व है। वहीं यह राग बिगड़ता  है तो मानवीय संबंध बिगड़ जाते हैं।

-"नाटक" का पटाक्षेप अवश्य होता है। जीवन नाटक नहीं यथार्थ है। सभी को जीना है। जो नाटक करता है वह यह नहीं समझता है कि समय आने पर नाटक की पोल खुल जाएगी। तब क्या होगा?

-आप जो आज हैं, कल नहीं थे। साथ ही कल भी नहीं रहेंगे, अतः आपका व्यवहार ही आपका जीवन भर साथ देगा।

-"कम बोलना" अच्छा है। कम बोलने से यह भी बात आती है कि इन्हें बोलना ही नहीं है और बोलना आता ही नहीं है। 

-ज्यादा नहीं बोले पर यह तो सोचे कि नहीं बोलने के चक्कर में सच का गला तो नहीं  घोटें।

-अपने मन में कभी यह भाव नहीं आना चाहिए कि मैं ही समझदार हूँ।आप भी समझदार हैं, पर आपके अलावा भी लोग समझदार हैं। आपको अवसर मिल गया और उन्हें अवसर नहीं मिला। अगर आपको अवसर मिला है तो सभी की योग्यता का लाभ लेना चाहिए।

-"अवसर" को बाँटो पर चाटो नहीं। 

-कुछ लोग इंसान होते हुए भी अपने को भगवान मानने लगते हैं।

-जब व्यक्ति का नाम होता है, तभी बदनाम होने की संभावनाएं बढ़ जाती है। जिसे डाल पर जरूरत से ज्यादा फल आ जाते हैं तो वह डाल टूट जाती है।



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