सियासी उठापटक की अटकलों के बीच टंडन की नियुक्ति से कांग्रेस सतर्क

भोपाल। केंद्र सरकार ने मप्र की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को हटाकर उनके स्थान पर बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन को मप्र की कमान सौंपी है। टंडन की नियुक्ति के साथ ही मप्र में राजनीतिक उठापटक की अटकलें शुरू हो गई हैं। टंडन को पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी का करीबी माना जाता है और जोड़-तोड़ की राजनीति के वे माहिर खिलाड़ी रहे हैं। फिलहाल मप्र में सियासत शांत है, लेकिन टंडन की अचानक हुई नियुक्ति से कांग्रेस अलर्ट हो गई है। 

मध्य प्रदेश में भाजपा को बेहद कम अंतर से सत्ता से चूक जाने का मलाल तो हैं, लेकिन वह राजनीतिक ऑपरेशन में जल्दबाजी नहीं करेगी। यहां कांग्रेस में बड़े नेताओं के बीच अंदरूनी टकराव की स्थिति बनी हुई है। भाजपा इसी का लाभ लेने की कोशिश कर सकती है। इस साल के आखिर में तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद ऐसी स्थितियां बन सकती हैं। राज्य में भाजपा बहुमत से महज 7 विधायक दूर है। ऐसे में उसे कर्नाटक की तरह कोई बड़ा आपरेशन नहीं करना है।  

मप्र में नया नेतृत्व खड़ा करेगी भाजपा  

मध्य प्रदेश में भाजपा तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके शिवराज सिंह चौहान की जगह नया नेतृत्व उभारना चाहती है। इसके अलावा उसका ध्यान राज्य सामाजिक व क्षेत्रीय संतुलन पर भी है। बदलाव होने की स्थिति में भाजपा राज्य में किसी नए नेता पर दांव लगाने की कोशिश करेगी। इसके लिए विधायकों से लेकर सांसदों के भी नामों की चर्चा है। मध्य प्रदेश में बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन को भेजे जाने से भी इस तरह की अटकलें है। उत्तर प्रदेश के राजनीतिक उठापटक के माहौल में अनुभवी नेता रहे लालजी टंडन मध्य प्रदेश में किसी भी तरह के राजनीतिक संकट में बेहतर ढंग से निपट सकते हैं। 

"To get the latest news update download the app"