इस सीट पर 'सियासी महाभारत', क्या 'ब्रह्मास्त्र' छोड़ेगी भाजपा

भोपाल। राजधानी भोपाल की सीट पर विधानसभा चुनाव का महा मुकाबला गरमाता जा रहा है। पहली लिस्ट में बाबूलाल गौर का नाम नहीं आने से गौर समर्थकों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। लगातार कयास लगाए जा रहे हैं कि गौर निर्दलीय लड़ सकते हैं। बीजेपी ने पहले संकेत दिए थे कि वह गौर को इस बार टिकट देने के पक्ष में नहीं है। लिहाजा गौर वहां से उनकी बहू कृष्णा गौर के लिए भी रायशुमारी में सुझाव दे चुके हैं। अगर दूसरी लिस्ट में बीजेपी गौर का पत्ता साफ करती है तो वह बीजेपी के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। लेकिन बीजेपी के पास भी एक ऐसा ब्रह्मास्त्र है जो इस बार वह इस्तेमाल कर सकती है। सूबे के मुखिया शिवराज सिंह चौहान को बीजेपी गोविंदपुरा सीट के उतार सकती है। 

सूत्रों के मुताबिक गौर ने दो टूक में पार्टी को संदेश दे दिया है कि अगर उनका या उनकी बहू का नाम गोविंदपुरा सीट से घोषित नहीं किया जाता है तो वह और उनकी बहू निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। गौर ने कहा कि अगर पार्टी टिकट नहीं देती है तो उन्हें मजबूरन गोविंदपुरा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ना पड़ेगा। यही नहीं ऐसी स्थिति में उनकी बहू भी राजधानी की हुजूर सीट से निर्दलीय चुनाव लडे़ंगी। इस तरह गौर बीजेपी की दो सीटों पर समीकरण बिड़ाग सकते हैं। लेकिन बीजेपी नेताओं की ओर अभी तक इस संबंध में कोई संकेत नहीं मिला है कि वह इस सीट पर किसी मौका देने वाली है। 

गौरतलब है कि इससे पहले भी विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को दो सीटों पर चुनाव लड़वाया था। सीएम सिंह बुधनी और विदिशा से चुनाव लड़े थे और दोनों ही सीटों पर भारी मतों से जीते थे। गोविंदपुरा सीट पर अगर पार्टी गौर का टिकट काटती है और बगावत होती है तो सीएम का विकल्प बीजेपी आजमा सकती है। हालांकि, दावेदारों में इस सीट पर आलोक शर्मा और तपन भौमिक भी प्रयासरत हैं। बीजेपी के लिए यह सीट गले की हड्डी बन गई है। अगर गौर का टिकट कटा तो बीजेपी की दो पारंपरिक सीटों पर प्रभाव पड़ेगा। हुजूर से रामेश्वर शर्मा को टिकट दिया गया है। लेेकिन कृष्णा गौर उनके खिलाफ लड़ती हैं तो बड़ा वोटबैंक कट सकता है।