नोटबंदी के बाद भी स्विस बैंक में 50 फीसदी बढ़ा भारतीयों का कालाधन

नई दिल्ली| 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान विदेशी बैंकों में जमा कालाधन देश में लाने के दावा कर सत्ता में आई मोदी सरकार के राज में वो धन वापस तो नहीं आया, बल्कि अब और ज्यादा संख्या में विदेशों में पैसा जमा होने लगा है| कालाधन ख़त्म करने के उद्देश्य से मोदी सरकार ने नोटबंदी की, जिससे देश की जनता को भरी संकट से गुजरना पड़ा| लेकिन देश हिट में लोगों ने इसे झेला और अब खबर है कि स्विस बैंक में पिछले एक साल में भारतीयों की जमा पूंजी में करीब 50% की बढ़ोतरी हुई है| पिछले तीन साल से ये आंकड़े लगातार घट रहे थे, लेकिन अचानक 2017 में इतनी लंबी छलांग मोदी सरकार के लिए चिंता बढ़ा सकती है|  

स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक के ताजा आंकड़ों में यह बात सामने आयी है कि भारतीयों द्वारा स्विस बैंक खातों में रखा गया धन 2017 में 50% से अधिक बढ़कर 7000 करोड़ रुपये (1.01 अरब फ्रेंक) हो गया| इससे पहले तीन साल यहां के बैंकों में भारतीयों के जमा धन में लगातार गिरावट आई थी| यह सब उस वक्त है जब देश में केंद्र सरकार ब्लैक मनी के खिलाफ कई अभियान चला रही है और कानून भी बन चुके हैं| लेकिन कालाधन देश से फिर भी विदेश पहुँच रहा है| यह हैरान करने वाला है| आंकड़ों के अनुसार स्विट्जरलैंड के बैंक खातों में विदेशी ग्राहकों का कुल धन 1460 अरब स्विस फ्रैंक (करीब 100 लाख करोड़ रुपये) से अधिक है।

भरतिया अपना धन स्विट्जरलैंड के बैंकों में रखते रहे हैं, इन बैंकों में पहचान गोपनीय रहती है, और समय समय पर इसको लेकर खुलासे भी हुए| वही मोदी सरकार बनने से पहले भाजपा ने कालेधन को लेकर जमकर भाषणबजी की थी, लेकिन यह चौकाने वाला है कि कालाधन अब ज्यादा विदेश पहुँच रहा है| 2016 में स्विस बैंकों में भारतीयों के धन में 45 फीसदी की कमी आई थी। सर्वाधिक सालाना गिरावट के बाद यह 676 मिलियन स्विस फ्रैंक (4,500 करोड़ रुपये) रह गया था। 1987 में यूरोपियन बैंक द्वारा डेटा सार्वजनिक किए जाने की शुरुआत के बाद से यह सबसे निचला स्तर था। SNB डेटा के मुताबिक, भारतीयों द्वारा स्विस बैंकों में प्रत्यक्ष रूप से रखे जाने वाला धन 2017 में बढ़कर 6,891 करोड़ रुपये हो गया, जबकि फंड मैनेजर्स के माध्यम से रखे जाना वाला धन 112 करोड़ रुपये रहा। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, स्विस बैंकों में जमा भारतीयों के धन में 3,200 करोड़ रुपये का कस्टमर डिपॉजिट, 1,050 करोड़ रुपये दूसरे बैंकों के जरिए और 2,640 करोड़ रुपये अन्य लायबिलिटीज के रूप में शामिल थे।