लोकायुक्त के शिकंजे में फंसा सहायक आयुक्त, 1 लाख 40 हजार की रिश्वत लेते रंगेहाथों धराया

सिवनी| सरकारी विभागों में रिश्वत का खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है| एक तरफ मुख्यमंत्री विभागों में भ्रष्टाचार ख़त्म कर निष्पक्ष काम करने की बात करते है, लेकिन अधिकारी कर्मचारी उनकी मंशा पर पानी फेर रहे है| लगातार बड़े अधिकारी लोकायुक्त के जाल में फंस रहे है| शनिवार को एक और बड़ा अधिकारी रिश्वत लेते रंगेहाथों ट्रैप हुआ है| मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में अन्य पिछड़ा वर्ग विभाग के सहायक आयुक्त और एक दैनिक वेतनभोगी कंप्यूटर ऑपरेटर को लोकायुक्त ने एक लाख चालीस हजार की रिश्वत लेते रंगेहाथों दबोचा है| 

जानकारी के मुताबिक, जबलपुर निवासी मनीष शर्मा का सिवनी में मीनाक्षी पैरामेडिकल कॉलेज है। यहां के 96 विद्यार्थियों की वर्ष 2016-17 में करीब 17 लाख की छात्रवृत्ति के भुगतान के लिए शर्मा ने श्रीवास से सपंर्क किया। मनीष शर्मा  से अन्य पिछड़ा वर्ग विभाग के सहायक आयुक्त विशाल श्रीवास, और बृजेश भार्गव  कंप्यूटर ऑपरेटर ने रिश्वत की मांग की थी|   जिसकी शिकायत फरियादी मनीष शर्मा ने लोकायुक्त से की थी| जिसके बाद लोकायुक्त डीएसपी कमल उइके के नेतृत्व में टीम ने आरोपी सहायक आयुक्त और कंप्यूटर ऑपरेटर को एक लाख चालीस हजार की रिश्वत लेते रंगेहाथों गिरफ्तार कर लिया| 

लोकायुक्त की टीम ने आरोपी के खिलाफ भ्रस्टाचार अधिनियम की धारा के तहत कार्रवाई की है| टीम में डीएसपी कमल उइके, निरीक्षक ऑस्कर किंडो, आरक्षक सोनू चौकसे, अतुल श्रीवास्तव, राकेश विश्वकर्मा शामिल रहे|