MP News: सरकार के इस निर्णय के खिलाफ BJP विधायक, बोलीं- आम आदमी पर असर पड़ता है

शहर में प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और इसके चलते लोगों की जेब पर खर्चा भी बढ रहा है। ऐसे में स्टांप ड्यूटी और पंजीयन फीस ज्यादा होने का खामियाजा जनता पर पड़ता है।

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भोपाल, डेस्क रिपोर्ट। देश में सबसे महंगा पेट्रोल (petrol) और डीजल (diesel) बेचने में अव्वल राज्यों में शुमार मध्यप्रदेश (madhya pradesh) में उपभोक्ताओं पर एक और भार देश भर में सबसे ज्यादा है। मध्यप्रदेश में संपत्ति खरीदने की स्टांप ड्यूटी 12.5 प्रतिशत है जो देश भर में सबसे ज्यादा है। बीजेपी (bjp) की विधायक (mla) कृष्णा गौर (krishna gaur) ने इसका विरोध कर आपत्ति दर्ज कराई है।

लंबे समय से देशभर में मंदी की मार झेल रहे जमीन व्यवसाय पर मध्यप्रदेश में एक और मार पड़ती है। यहां पर स्टांप ड्यूटी (stamp duty) और पंजीयन फीस (registration fees) 12.5% है जबकि उत्तर प्रदेश में यह 8%, झारखंड में 7%, गुजरात में 5.90%, उड़ीसा में 7% और महाराष्ट्र में 6% है। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में इसे लेकर बीजेपी विधायक कृष्णा गौर ने कड़ी आपत्ति जताई।

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उनका कहना था कि प्रदेश भर में घर की रजिस्ट्री कराना देश भर में सबसे ज्यादा महंगा है क्योंकि महाराष्ट्र व गुजरात की तुलना में यहां स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस लगभग दोगुनी है। शहर में प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और इसके चलते लोगों की जेब पर खर्चा भी बढ रहा है। ऐसे में स्टांप ड्यूटी और पंजीयन फीस ज्यादा होने का खामियाजा जनता पर पड़ता है। जून से दिसंबर के बीच जब सरकार ने 2% स्टांप ड्यूटी कम की थी तब काफी रजिस्ट्री हुई थी और इसलिए स्टांप ड्यूटी और पंजीयन फीस कम करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाना चाहिए। यदि ऐसा किया जाता है तो जमीनों की खरीद में तेजी आऐगी

कृष्णा की इस बात का समर्थन क्रेडाई के अध्यक्ष और सदस्यों ने भी किया। उन्होंने कहा कि जब इस तरह की व्यवस्था रहती है तो संपत्ति की रजिस्ट्री और तेजी से होती हैं और इसका फायदा सरकार और जनता दोनों को होता है। यदि स्टांप ड्यूटी और पंजीयन फीस बढ़ाई जाती है तो कुछ समय तक तो सरकार को ज्यादा राशि मिल सकती है लेकिन बाद में इसके परिणाम सामने आते हैं और संपत्ति की खरीद बिक्री कम हो जाती है। अकेले भोपाल में इस तरह की करीब एक लाख प्रॉपर्टी है जिनकी खरीद पर इसका विपरीत असर पड़ेगा। कृष्णा गौर के इस प्रस्ताव को राज्य सरकार को भेजने के निर्देश कलेक्टर अविनाश लवानिया दे दिए हैं।