ग्वालियर, अतुल सक्सेना। नकली प्लाज्मा ( Fake Plasma) चढ़ाने से हुई एक व्यक्ति की मौत के बाद उजागर हुई खून (Blood)और प्लाज्मा (Plasma) दलालों की गैंग के सरगना सहित अन्य सक्रिय सदस्यों को तो पुलिस (Police) ने गिरफ्तार कर लिया है लेकिन पुलिस ने जो मामले की FIR दर्ज की है उसपर सवाल उठ रहे हैं। इसकी वजह ये है कि पड़ाव थाना पुलिस ने जो FIR दर्ज की है उसमें शिकायतकर्ता को फरियादी न बनाते हुए थाना प्रभारी को फरियादी बनाया गया है। शिकायतकर्ता ने इसपर आपत्ति जताते हुए अपोलो अस्पताल (Apollo Hospital) को बचाने की साजिश के आरोप लगाए हैं। और मामले की सीबीआई से जांच कराने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है इसकी प्रति प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री सहित मध्यप्रदेश के राज्यपाल, गृह मंत्री और वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को भेजी है।

दतिया के कारोबारी मनोज गुप्ता (Manoj Gupta )  की कोरोना संक्रमित (Corona Infected)होने के बाद अपोलो अस्पताल में प्लाज्मा चढ़ाने के बाद हुई मौत ने जिला प्रशासन के हाथ एक ऐसा गिरोह लग गया जो कोरोना मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर मोटी रकम लेकर उन्हें नकली प्लाज्मा थमा रहे थे। मनोज के परिजन नरेश कुमार गुप्ता भी इस गिरोह के चंगुल में आ गए और उन्होंने 18,000 रुपये में प्लाज्मा खरीदकर अपोलो अस्पताल में भर्ती मनोज गुप्ता को चढवा दिया। प्लाज्मा चढने के बाद मनोज की तबियत और खराब हो गई और उनकी मौत हो गई।

JAH की रसीद थी फर्जी, प्लाज्मा था नकली

मनोज की मौत के बाद जब नरेश गुप्ता और अन्य परिजनों ने हंगामा किया तो खुलासा हुआ कि प्लाज्मा जिस JAH की रसीद के नाम पर दिया गया वो रसीद फर्जी थी और प्लाज्मा नकली था। परिजनों ने मनोज की मौत के बाद 10 दिसंबर को एक शिकायती आवेदन पड़ाव थाने में दिया। जिसकी जांच में खुलासा हुआ कि जिस अजय त्यागी से इन लोगों ने 18,000 रुपये में प्लाज्मा खरीदा था वो ब्लड बैंक और प्राइवेट अस्पतालों के कर्मचारियों के साथ मिलकर एक गिरोह चलाता है। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अजय त्यागी, महेश मौर्य और जगदीश भदकारिया को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

FIR में शिकायतकर्ता की जगह थाना प्रभारी बने फरियादी

गौरतलब है कि नरेश कुमार गुप्ता ने 10 दिसंबर को थाने में शिकायती आवेदन दिया और अपोलो अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ एक्शन लेने की मांग की। पड़ाव पुलिस ने 13 दिसंबर को FIR दर्ज की । इस FIR की खास बात ये है कि इसमें शिकायतकर्ता नरेश गुप्ता को फरियादी न बनाते हुए थाना प्रभारी मुकेश शर्मा खुद फरियादी बने हैं । इतना ही नहीं FIR अपोलो अस्पताल के मैनेजर के हवाले से लिखी गई है। उसमें लिखा है कि मैनेजर 10 दिसंबर को प्रांशुल शर्मा ने
थाने आकर मनोज गुप्ता की मौत की जानकारी दी। पुलिस यहीं नहीं रुकी पुलिस ने इस FIR में मृतक के परिजनों नरेश गुप्ता और अखिलेश गुप्ता को साक्षी बताते हुए उनके कथन लेना बताया।

परिजनों ने लिखा CM को पत्र, PM गृह मंत्री को भेजा, CBI जांच की मांग

मनोज गुप्ता की जान नकली प्लाज्मा गिरोह फंसकर जाने के बाद परिजन दुखी हैं। उन्हें उम्मीद थी कि जिस तरह ग्वालियर पुलिस और प्रशासन ने आरोपियों को पकड़कर तेजी दिखाई है उतनी ही तेजी से लापरवाह अपोलो अस्पताल प्रबंधन को सजा भी मिलेगी लेकिन FIR देखने के बाद वे गुस्से में हैं उनका आरोप है कि पुलिस द्वारा हमें फरियादी न बनाते हुए खुद फरियादी बन जाना साफ करता है कि पुलिस अपोलो अस्पताल प्रबंधन को बचाना चाहती है। मृतक मनोज गुप्ता के परिजन नरेश कुमार गुप्ता ने इस मामले को CBI को सौंपने की मांग की है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखे पत्र में उन्होंने घटना का जिक्र करते हुए पुलिस की मंशा पर सवाल उठाये हैं। उन्होंने पत्र की प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्ष वर्धन, मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन, गृह मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री सहित वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को भेजी है और मामले की जांच CBI से कराने की मांग की है। उधर पूर्व मंत्री व बुजुर्ग भाजपा नेता लक्ष्मी नारायण गुप्ता ( नन्नाजी ) ने सीएम शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मनोज गुप्ता मामले की CBI जांच की मांग की है।