जबलपुर में बनेगी फंगस की दवा, राज्य सरकार ने दी मंजूरी

राज्य सरकार ने जबलपुर में फंगस की दवा बनाने की मंजूरी दे दी है। जिसके लिए तैयारियां शुरू कर दी गई है।

जबलपुर, संदीप कुमार। ब्लैक-व्हाइट-पिंक-ग्रीन कोई भी फंगस (Fungus) हो अब डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इस बीमारी की दवा अब मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के जबलपुर में बनेगी। जिसके लिए राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। मध्यप्रदेश नर्सिंग होम एसोसिएशन (Madhya Pradesh Nursing Home Association) के अध्यक्ष की पहल पर यह सफलता जबलपुर को मिली है। जिसके बाद अब औद्योगिक क्षेत्र उमरिया-डूंगारिया में स्थित लैब में फंगस बीमारी से निदान के लिए एम्फोटरिसन बी इंजेक्शन (Amphotrison B Injection) बनाने की मंजूरी मिलने के बाद कंपनी ने तैयारी शुरू कर दी है।

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मध्यप्रदेश नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र जामदार ने बताया कि इस संक्रमण काल में मध्यप्रदेश सरकार ने बीमारी से पीड़ित लोगों को जो सौगात दी है। वह तारीफ के लायक है, अनुमति मिलने के बाद अब जल्द ही जबलपुर में फंगस से निपटने के लिए इंजेक्शन बनाना शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूरा देश कोरोना के बाद अब न्यूकोर माइकोसिस बीमारी से ग्रसित है और इसी बीमारी को आम भाषा में फंगस कहते हैं, जो कि अभी तक कई रंग में सामने आई है। इस आपातकाल की स्थिति में मध्यप्रदेश सरकार ने जबलपुर की रेवा क्योर लाइफ साइंस नाम की कंपनी को फंगस से बचाव में उपयोग होने वाले इंजेक्शन बनाने का काम दिया है जो कि बहुत ही खुशी की बात है।

आसानी से उपलब्ध होगा इंजेक्शन

डॉ. जितेंद्र जामदार ने कहा कि अगर जबलपुर में एम्फोटरिसन बी इंजेक्शन बनने लगा तो सिर्फ जबलपुर ही नहीं बल्कि समूचे महाकोशल-विंध्य और बुंदेलखंड में इस बीमारी से ग्रसित मरीजों के लिए आसानी से यह दवा उपलब्ध हो जाएगी। फंगस से ग्रसित मरीज को एम्फोटरिसन बी इंजेक्शन रोजाना 4 लगाए जाते हैं, जो कि करीब 30 से 40 दिन तक लगते हैं। अभी बाजार में जो एम्फोटरिसन बी इंजेक्शन की कीमत करीब 4500 से 5 हजार रुपये है। अगर यही इंजेक्शन जबलपुर में बनने लगेगा तो न सिर्फ इसकी कीमत तकरीबन आधी हो जाएगी, बल्कि यह आसानी से उपलब्ध भी हो जाएगा।

एक भी मरीज की नहीं निकाली आंख

जबलपुर मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में पदस्थ डॉक्टर सौम्या सैनी के मुताबिक आंख, जबड़ा व तालू से जुड़े ब्लैक फंगस के मरीज अधिक संख्या में आ रहे हैं। फंगस के कारण मेडिकल में अब तक एक भी मरीज की आंख नहीं निकाली गई। नेजल एंडोस्कोपी के माध्यम से आंख के पिछले हिस्से में भरी मवाद को बाहर निकालकर आंखों की रोशनी बचाई गई है। डॉक्टर सौम्या सैनी के मुताबिक कोविड इलाज के दौरान व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि अभी तक सारे मरीज शुगर पीड़ित ही मिले हैं। इसमें से कुछ को पहले से शुगर था और कुछ को पोस्ट कोविड के बाद हुआ, अधिकतर मरीज को स्टेरॉयड इंजेक्शन भी दिए गए हैं।

जबलपुर में मरीजों की स्थिति

वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में फंगस से ग्रसित मरीजों के लिए चार वार्ड बनाए गए हैं। जिनमें भर्ती फंगस से ग्रसित मरीजों की संख्या करीब 122 है। जबकि अब तक फंगस से पूरी तरह स्वस्थ होकर 27 मरीज घर जा चुके हैं। वहीं फंगस से अब तक 10 मरीजों की मौत हुई है। इसके अलावा कुछ मरीज जबलपुर के निजी अस्पतालों में भी भर्ती है जिनका इलाज जारी है।