मेरे खिलाफ कार्रवाई विपक्ष में रहने की सजा- संजय पाठक

कटनी//वंदना तिवारी. पूर्व मंत्री (former minister) और बीजेपी (bjp) के विधायक (mla) संजय पाठक (sanjay pathak) ने कांग्रेस (congress) की सरकार (government) पर गंभीर आरोप लगाया है। दरअसल बुधवार को संजय पाठक की छह खदानों को जिला प्रशासन (district administration) ने सुप्रीम कोर्ट (supreme court) के आदेश (order) का हवाला देकर सील कर दिया ।आयरन ओर की इन खदानों को सील किए जाने को संजय पाठक ने प्रशासन और सरकार की दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बताया है।

पाठक का कहना है कि क्योंकि वे भाजपा (bjp) में हैं और कांग्रेस में जाना नहीं चाहते ,इसीलिए अब उनके परिवार और व्यापार दोनों के ऊपर सरकार प्रहार कर रही है। स्वस्थ लोकतंत्र के लिए इससे गंभीर खतरा बताते हुए संजय पाठक ने कहा कि अगर उन्हें विपक्ष में रहने की यह सजा मिल रही है तो यह सजा भुगतने के लिए वे तैयार हैं ।पाठक ने साफ तौर पर कहा कि उनका किसी भी तरह का खनिज (mining) का कोई भी मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित नहीं है, जैसा जिला प्रशासन ने कार्रवाई करने में उल्लेखित किया है। दरअसल संजय पाठक पहले कांग्रेस के ही विधायक हुआ करते थे लेकिन 2013 में कांग्रेस के टिकट से चुनाव जीतने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था और भाजपा में शामिल होकर दोबारा चुनाव लड़ा और फिर बीजेपी के विधायक एक बार फिर 2018 में भी बने ।इस बीच वे 2014 से 2018 तक बीजेपी सरकार में मंत्री भी रहे।

ये है पूरा मामला

जबलपुर में बीजेपी विधायक संजय पाठक की खदान को कलेक्टर ने पुनः बंद करने के आदेश दिए है। संजय पाठक शिवराज सिंह चौहान के सरकार में मंत्री रह चुके हैं। ये खदाने मेसर्स निर्मला मिनरल्स के नाम से सिहोरा तहसील के ग्राम अगरिया और दुबियारा में हैं। जबलपुर कलेक्टर ने इसके संबंध में एक आदेश जारी किया है। कलेक्टर भरत यादव ने पूर्व में जारी स्थगन आदेश को निरस्त कर खदान को पुनः बंद करने के आदेश दिए है।

इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने 3 मई 2019 को आदेश जारी किया था, जिसमें वन भूमि पर संचालित दोनों खदानों में खनन व संचालन रोकने के आदेश दिए गए थे। जिसके बाद कलेक्टर जबलपुर ने 10 जून 2019 को खनन पर रोक लगा दी थी। मामले में खदान संचालक द्वारा प्रस्तुत आवेदन और महाधिवक्ता की राय पर कलेक्टर ने अपने पूर्व आदेश पर रोक लगाते हुए 13 अगस्त 2019 को स्थगन दिया था। लगभग 6 माह बाद भी खदान संचालक यह साबित नही कर पाए कि जिस भूमि पर खनन हो रही है वह भूमि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से प्रभावित नही होती हैं। जिसके आधार पर कलेक्टर ने पूर्व में जारी स्थगन आदेश निरस्त कर खदानों को पुनः बंद करने के आदेश दिए हैं।

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