मध्य प्रदेश के DGP की रेस में शामिल यह अफसर, वीके सिंह पर फैसला अटका

भोपाल। मध्य प्रदेश के नए डीजीपी को लेकर एक बार फिर अटकलें तेज़ हो गईं हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ वर्तमान डीजीपी वीके सिंह से खफा बताए जा रहे हैं। यही कारण है कि सिंह के नाम पर फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले दिनों में सीएम कमलनाथ बड़ा बदलाव कर सकता हैं। पिछले महीने हुई डीपीसी में डीजीपी का नाम तय होना था। लेकिन सीएम की ओर से सिंह के नाम पर फिलहाल विराम लग गया है। ऐसी अटकलें हैं कि किसी और को यह पद मिल सकता है। जिसके कई नाम भी सामने आए हैं। 

दरअसल, सीएम मोहंती द्वारा भेजी गई फाइल पर सीएम ने कोई एक्शन नहीं लिया है। जिस वजह से ऐसी अटकलें हैं कि डीजीपी पद के लिए किसी और को मौका मिल सकता है। 1984 बैच के तीन आईपीएस अफसरों के नामों वर्तमान पुलिस महानिदेशक वीके सिंह, बीएसएफ के डीजी विवेक जौहरी और पुलिस रिफोर्म के स्पेशल डीजी मैथलीशरण गुप्ता का नाम पैनल में शामिल है। जिनमें से वीके सिंह का नाम तय माना जा रहा था। लेकिन फाइल होल्ड होने से अब नए समीकरण बन रहे हैं। वीके सिंह ने सीएम को बताए बिना ही हनीट्रैप मामले में आईजी डी श्रीनावास के बजाए एडीजी संजीव शमी को एसआईटी का प्रमुख बनाया था। उनके इस कदम से सीएम खफा हुए थे। 

तब नाराज नाथ ने शमी को हटाकर विशेष डीजी राजेंद्र कुमार को एसआईटी का प्रमुख नियुक्त किया। मुख्यमंत्री उस घटना के बाद सिंह से नाराज़ चल रहे हैं। 13 नवंबर को लोक सेवा आयोग की बैठक में डीजीपी के पद के लिए तीन नामों के एक पैनल पर चर्चा हुई। सिंह के अलावा, पैनल में दो नाम थे, 1984 बैच के आईपीएस अधिकारियों मैथिलीशरण गुप्ता और विवेक जौहरी। डीपीसी के बाद ऐसा माना जा रहा था कि सिंह का नाम ही दोबारा फाइनल होगा। लेकिन अभी तक सीएम की मंज़ूरी नहीं मिलने से समीकरण बदलते दिख रहे हैं। डीजीपी के लिए पैनल के नियमों के अनुसार सेवानिवृत्ति में न्यूनतम छह महीने और पैनल के गठन की तारीख में अंतर होना चाहिए।

जौहरी और गुप्ता अगले साल सितंबर में सेवानिवृत्त होंगे, इसलिए अप्रैल में एक नया पैनल बनाया जा सकता है। राजेंद्र कुमार, शैलेंद्र श्रीवास्तव, महान भारत सागर का नाम डीजीपी के लिए पैनल में नहीं आ सकता है, क्योंकि वे छह महीने बाद रिटायर होंगे। सिंह, जिन्हें इस वर्ष 30 जनवरी को डीजीपी बनाया गया है, 30 मार्च, 2021 को सेवानिवृत्त होंगे। इसलिए उनका कार्यकाल समाप्त होने से पहले, एक अन्य आईपीएस अधिकारी को डीजीपी बनाया जा सकता है।

(रिपोर्ट-अल्तमश जलाल)