क्या अभी 30 साल की उम्र पार कर चुके हैं तो अपने सेहत से जुड़ी यह खबर जरूर पढ़ें

यदि आप भी 30 साल से अधिक उम्र वाले हैं तो इस न्यूज़ को ध्यान से पढ़ें क्योंकि अस्वस्थ जीवन शैली के कारण युवा वर्ग में मेटाबॉलिक सिंड्रोम की समस्या बढ़ती ही जा रही है।

हेल्थ, डेस्क रिपोर्ट। पिछले कुछ सालों से देखने में आया है कि लोगों को लिवर से जुड़ी समस्याएं अधिक हो रही हैं आखिर ऐसा क्यों है? क्या आपने कभी सोचा है? दरअसल लीवर की समस्या बढ़ने का कारण अल्कोहल का बढ़ता चलन है। इसके अलावा खान-पान से जुड़ी कई बातें भी हैं जो लीवर को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अप्रैल को दुनिया भर में वर्ल्ड लिवर डे मनाया जाएगा तो आइए जानते हैं इस मौके पर कि लीवर को कैसे स्वस्थ और सेहतमंद रखा जा सकता है।

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लीवर हमारा किस कंडीशन पर हैं यह जानने के लिए आप कुछ टेस्ट करवा सकते हैं जिनमें शामिल है

लिवर फंक्शन टेस्ट
फैटी लीवर के लोगों के लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण जांच है इस जांच से लीवर में प्रोटीन और अन्य एंजाइम्स के स्तर के बारे में जानकारी मिलती है।

अल्ट्रासाउंड
फैटी लीवर की स्थिति का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है।

फाइब्रोस्कैन
लिवर की एडवांस स्टेज 3 और 4 में कितनी क्षति हुई है यह जानने के लिए इसकी जांच की जाती है।

इंडोस्कोपी
किसी का फैटी लीवर किस स्टेज में है बीमारी के या संक्रमण के वह इस टेस्ट से पता चलता है।

लिवर बायोप्सी
लीवर से संबंधित संक्रमण के लिए कई मामलों में इस जांच को करवाया जाता है।

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यदि आप भी 30 साल से अधिक उम्र वाले हैं तो इस न्यूज़ को ध्यान से पढ़ें क्योंकि अस्वस्थ जीवन शैली के कारण युवा वर्ग में मेटाबॉलिक सिंड्रोम की समस्या बढ़ती ही जा रही है। इस समस्या के कारण व्यक्ति में उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, रक्त में कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड का स्तर बढ़ने के साथ मोटापे की समस्या भी शुरू हो जाती है और इस तरह आपके फैटी लीवर के ऊपर अत्यधिक प्रभाव पड़ता है।

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लिवर को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें

  • नौकरी और वर्क हर किसी को करना है, इसके चलते सुबह का नाश्ता ना छोड़े और कोशिश करें। नाश्ते में अंकुरित अनाज मौसमी फल और ड्राई फ्रूट्स को शामिल करें। साथ ही खट्टे फल को खाएं।
  • जो फूड्स मोटापा बढ़ाते हैं कैलोरी बढ़ाते हैं। उन फूड से दूर रहें और पैकेजिंग खाने को तो बिल्कुल भी ना कह दें।
  • तनाव मुक्त रहें अन्यथा आपके भूख प्यास पर इसका असर पड़ेगा साथी मनोचिकित्सक से मिले और योग एवं प्राणायाम करें।
  • पूरी नींद लें 7 से 8 घंटे की और सोने और जागने का समय भी तय करें।