Stone Currency: सिक्के या नोट नहीं बल्कि पत्थर है इस जगह की करेंसी, सदियों से चल रहा है लेनदेन

Diksha Bhanupriy
Published on -
Stone Currency

Stone currency Yap Island: जब हम बाजार में कोई चीज खरीदने के लिए जाते हैं तो उसके बदले में हमें पैसे देने होते हैं। वस्तुओं की खरीद-फरोख्त के दौरान किया जाने वाला यह लेनदेन आज से नहीं बल्कि सदियों से चला रहा है। एक समय ऐसा था जब चीजों के बदले चीजें खरीदी जाती थी लेकिन आज हर देश की अपनी एक करेंसी है। जिनमें से ज्यादातर जगहों पर कागज के नोट और सिक्के चलते हैं।

21वीं सदी के आधुनिक हो चले इस दौर में अगर आपको यह बताया जाए कि एक ऐसी जगह है जहां पर पत्थरों के जरिए सामानों की खरीदी की जाती है तो कोई भी चौंक जाएगा। लेकिन एक जगह वाकई में ऐसी है जहां पर धातु के सिक्के या फिर कागज के नोट नहीं चलते हैं बल्कि यहां की मुद्रा पत्थर है। आज हम आपको इस जगह की जानकारी देते हैं।

यहां चलती है Stone Currency

दुनिया में जब मुद्रा तैयार नहीं की गई थी तब बार्टर सिस्टम अपनाया जाता था। इसका मतलब होता था जो सामान जितना लिया जा रहा है उतनी ही कीमत का दूसरा सामान सामने वाले को दे दिया जाता था। आजकल के दौर में भी ये सिस्टम बार्टर डील के नाम से जाना जाता है जो लोग एक दूसरे के बीच करते हैं।

Stone Currency

प्रशांत महासागर में मौजूद यप द्वीप इन सब से बिल्कुल अलग है और वहां पर पत्थर की करेंसी का चलन है। इंसान चांद पर पहुंच चुका है उसके बावजूद भी इस आइलैंड में पत्थर की करेंसी से खरीद-फरोख्त करना वाकई में हैरान कर देने वाली बात है।

इंसानों जैसी है यप आईलैंड की करेंसी

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो 100 स्क्वायर किलोमीटर क्षेत्र में फैले यप आईलैंड में कई सारे छोटे-छोटे गांव है और यहां की कुल आबादी 12000 है। यहां रहने वाले सभी परिवारों के पास पत्थर की करेंसी है जिस पर उनका नाम भी लिखा होता है।

Stone Currency

करेंसी का साइज यहां पर व्यक्ति के साइज के मुताबिक रहता है। यानी जितना छोटा इंसान है उतना छोटा पत्थर और जितना बड़ा इंसान है उतना बड़ा पत्थर। दोनों के बीच में एक छेद होता है और वजन के हिसाब से पत्थर की करेंसी का दाम भी बढ़ता है। जिसके पास जितना भारी पत्थर होता है उसकी उतनी कीमत मानी जाती है और भारी पत्थर रखने वाले परिवारों को यहां अमीर माना जाता है।

इसलिए है पत्थर की करेंसी

इस जगह पर पत्थर की करेंसी शुरू करने की अजीबोगरीब पहल कब की गई है इस बारे में कोई पुख्ता सबूत तो नहीं मिलता है। लेकिन कहा जाता है कि यह ऐसी जगह है जहां पर बेशकीमती कच्चे माल या धातु उपलब्ध नहीं है, इसी वजह से यहां पर पत्थर के पैसे चलाए जाते हैं। सदियों से यहां रहने वाले लोग चूना पत्थर को करेंसी के रूप में इस्तेमाल करते आ रहे हैं।


About Author
Diksha Bhanupriy

Diksha Bhanupriy

"पत्रकारिता का मुख्य काम है, लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को संदर्भ के साथ इस तरह रखना कि हम उसका इस्तेमाल मनुष्य की स्थिति सुधारने में कर सकें।” इसी उद्देश्य के साथ मैं पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कॉन्टेंट राइटिंग करना जानती हूं। मेरे पसंदीदा विषय दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली समेत अन्य विषयों से संबंधित है।

Other Latest News