अनूपपुर कलेक्टर की चेतावनी- ऐसा नहीं किया तो रुकेगा तहसीलदारों का वेतन

अनूपपुर कलेक्टर

अनूपपुर, डेस्क रिपोर्ट।CM HELPLINE में लापरवाही बरतने पर अनूपपुर कलेक्टर (Anuppur Collector) ने तहसीलदाररों को चेतावनी दी है। कलेक्टर ने कहा है कि यदि सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) की शिकायतों का निराकरण नहीं किया जाता, तो उनका आगामी दो माह का वेतन (Salary) संचयी प्रभाव से रोक दिया जाएगा।

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दरअसल, अनूपपुर कलेक्टर चन्द्रमोहन ठाकुर ने सीएम हेल्पलाइन  की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिले के अनूपपुर, कोतमा, जैतहरी एवं पुष्पराजगढ़ तहसीलों के तहसीलदारों को निर्देश दिए हैं कि उनके द्वारा आगामी समय-सीमा पत्रों की समीक्षा बैठक के पूर्व यदि सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का निराकरण नहीं किया जाता, तो उनका आगामी दो माह का वेतन संचयी प्रभाव से रोक दिया जाएगा।

वही अनूपपुर कलेक्टर ने सरकारी प्रोजेक्ट एवं कल्याणकारी योजनाओं में हितग्राहियों को ऋण राशि उपलब्ध कराने में हीला हवाली देने वाले बैंकर्स को भी कड़ी फटकार लगाई है। कलेक्टर ने साफ कहा है कि यदि दो दिवस में इस वित्तीय वर्ष के लंबित लक्ष्यों को पूरा करने में उदासीनता दिखाई तो प्रशासन से उन्हें भी कोई सहयोग नहीं दिया जाएगा।

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अनूपपुर कलेक्टर ने विशेषकर इसके लिए भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी को आड़ेहाथों लिया और कहा कि सरकारी प्रोजेक्ट एवं शासन की प्राथमिकता वाली कल्याणकारी योजनाओं में ऋण राशि उपलब्ध कराने में उदासीनता बरतने वाले बैंकों से सरकारी धन राशि को उठाकर उन बैंकों में जमा कराया जाएगा, जो रोजगारमूलक योजनाओं में हितग्राहियों को फाइनेंस कर रहे हैं। इसके लिए ऐसे बैंकों को ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा।

कलेक्टर ने साफ किया कि अगर ऐसे बैंकों से संबंधित विभाग के अधिकारी ने जमा राशि नहीं उठाई, तो उसको भी नोटिस जारी किया जाएगा। ऋण प्रकरणों के सिलसिले में जिस अधिकारी-कर्मचारी के साथ शाखा प्रबंधक का व्यवहार ठीक नहीं रहा, उनके विरुद्ध अनशासनात्मक कार्रवाई किए जाने हेतु उनके वरिष्ठ अधिकारी को पत्र लिखा जाए।

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कलेक्टर ने कहा कि जिन बैंक शाखाओं ने इस वित्तीय वर्ष में प्रकरणों के ऋण वितरण में सहयोग दिया है, उन्हें आगामी वित्तीय वर्ष में प्रशासन से पूर्ण सहयोग दिया जाएगा। किन्तु जिन बैंकों (Bank) ने इस मामले में सहयोग नहीं दिया है, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर ने बैंकर्स से कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष में उन्हें पहले ही पर्याप्त संख्या में प्रकरण भिजवा दिए जाएंगे, ताकि उन्हें उनका चयन करने में दिक्कत ना हो।