बालाघाट, सुनील कोरे। बालाघाट (Balaghat) जिले में लाल आतंक ने एक बार फिर अपनी मौजूदगी दर्ज की है। इस बार नक्सलियों (Naxalites) ने रूपझर थाना अंतर्गत बिठली चौकी के ब्रम्हनी निवासी ग्रामीण भागचंद अड़मे को पुलिस मुखबिर बताते हुए गोली मारकर हत्या कर दी। घटना बीते 29 जून की रात की है, जब एक दर्जन से ज्यादा सशस्त्र नक्सलियों ने खाना खाने बैठे ग्रामीण भागचंद अड़मे के घर में घुसकर उसे अपने साथ जंगल ले गये और उसकी गोली मारकर हत्या कर दी।

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घटना की सूचना सुबह-सुबह परिजनों ने बिठली चौकी में दी। हालांकि घटना के घंटो बाद भी पुलिस घटनास्थल नहीं पहुंच सकी थी। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि ऐसी घटनाओ में पुलिस कभी सीधे रास्ते से नहीं जाती है, बल्कि पुलिस घटनास्थल के आसपास घटना के बाद फरार नक्सलियों की तलाश के लिए सर्चिंग कर रही है। पुलिस अधीक्षक अभिषेक तिवारी ने बताया कि मृतक के शव का बैहर अस्पताल में पीएम कराया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

खत भी छोड़ा
नक्सलियों ने पुलिस मुखबिर बताते हुए भागचंद अड़मे की गोली मारकर हत्या करने के बाद एक पत्र भी छोड़ा है, जिसमें माकपा (माओवादी) तांडा-मलाजखंड एरिया कमेटी द्वारा पुलिस मुखबिर खबरदार हो, जनता से गद्दारी करनेवाल जनद्रोही ग्राम बमनी निवासी भागचंद अड़मे को पुलिस मुखबिरी में मौत की सजा दी जाती है, जैसी चेतावनी लिखी गई है।

गौरतलब हो कि कई दशको से बालाघाट जिला नक्सली आतंक से लड़ रहा है। विगत कुछ सालो में बालाघाट पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ कई बड़ी कार्रवाई की। जिसमें पुलिस ने एनकाउंटर में पुरूष और महिला नक्सलियों को मार भी गिराकर नक्सलियों के मंसुबो और हौंसलो को तोड़ने काम किया। हालांकि पुलिस कार्रवाई के बाद नक्सली कोई बड़ी घटना को अंजाम तो नहीें दे सकेंगे, लेकिन समय-समय पर पुलिस मुखबिरी के नाम पर ग्रामीणो की हत्या, निर्माण कार्यो में लगी मशीनरी और तेंदुपत्ता फड़ो पर आगजनी कर जिले में नक्सली अपनी मौजूदगी का अहसास कराते रहे है, जबकि बीती रात लगभग एक दर्जन से ज्यादा पुरूष और महिला सशस्त्र नक्सलियों ने ग्रामीण भागचंद अड़मे की पुलिस मुखबिरी के नाम पर गोली मारकर हत्या कर दी।

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मृतक भागचंद अड़मे की पत्नी हेमलता ने बताया कि रात में लगभग 9 बजे जब वह खाने खा रहे थे, इस दौरान ही सशस्त्र नक्सली घर के अंदर आये, जिनके पास से बंदूकें और डंडा था। जिन्हें एकदम से घर में देखने के बाद वह डर गये। खाना खा रहे पति से कुछ बात करने का कहकर अपने साथ लेकर घर से निकले और आंगन में आम के पेड़ के पास उनके दोनो हाथ पीछे बांध दिये। घर आये नक्सलियों में महिला नक्सली भी थी। जिसके बाद जब देररात तक भागचंद अड़मे घर नहीं पहुंचा तो चितिंत और घबराई पत्नी ने इसकी जानकारी परिजनों और गांववालों को दी।

हर्रानाला रोड में मिला शव
पत्नी की मानें तो जब देररात तक पति घर नहीं लौटे तो उन्होंने घटना की जानकारी परिजनों और गांववालो को दी। जिसके बाद नक्सलियों द्वारा लेकर गये भागचंद अड़मे को ढूंढने का प्रयास किया गया। इस दौरान उसका शव हर्रानाला रोड पर पड़ा मिला। भतीजे अशोक अड़मे की मानें तो खाना खाते समय चाचा भागचंद अड़मे को गोंडी भाषा में बात करते हुए घर से लेकर निकले थे, जिसके पास नक्सली उन्हें पालागोंदी रोड पर लेकर गये और हर्रानाला मार्ग में घेरा बनाकर चाचा को गोली मारकर हत्या कर दी। पत्नी की मानें तो पति ने कभी पुलिस मुखबिरी का काम नहीं किया है, पति भागचंद अड़मे खेती मजदूरी के साथ ही कभी-कभी ऑटो चलाता था। पत्नी ने रोते हुए बताया कि आखिर वह कैसे जीये, एक ओर नक्सली का भय तो दूसरी ओर पुलिस का। पति ने कहा कि अब डर लगता है कि न जाने कब वह आकर हम लोगों को भी न मार दे। बताया जाता है कि मृतक के तीन बच्चे है, जिसमें बड़ी बेटी महाविद्यालय की पढ़ाई कर रही है।

ग्रामीणों के चेहरे पर दिखाई दे रहा घटना का भय
रूपझर थाना अंतर्गत बिठली चौकी के ग्राम ब्रम्हनी में 29 जून की रात नक्सलियों द्वारा पुलिस मुखबिरी के शक में ग्रामीण की हत्या किये जाने से गांव में गम का माहौल है, घटना के बाद मृतक ग्रामीण के घर में हुई गमी में ग्रामीण मौजूद थे। जनके चेहरे पर घटना का भय देखा जा सकता था। जिले मंे भागचंद अड़मे की पुलिस मुखबिरी के शक में हत्या किये जाने की यह कोई पहली घटना नहीं है, इसके पूर्व भी नक्सली, पुलिस मुखबिरी के शक में भोले-भाले ग्रामीणों की हत्या कर अपनी दहशत और भय पैदा करने का प्रयास कर चुके है, ताकि उनका ऐजेंडा और उनका भय बना रहे।

भागचंद अड़मे पुलिस मुखबिर नहीं था-अभिषेक तिवारी
इस मामले में पुलिस अधीक्षक अभिषेक तिवारी ने साफ किया गया कि भागचंद अड़मे पुलिस मुखबिर नहीं था। सुबह बिठली चौकी में ब्रम्हनी निवासी ग्रामीण की नक्सलियों द्वारा गोली मारकर हत्या किये जाने की सूचना मिली थी। जिसमें लगभग एक दर्जन से ज्यादा नक्सली शामिल थे। जिसमें कुछ लोगों की पहचान हो गई है। घर से बाहर निकालकर नक्सलियों ने अपना भय और दहशत पैदा करने की मंशा से कायराना हत्या की है। मृतक का पीएम बैहर अस्पताल में करवाया जा रहा है और मामले की विवेचना की जा रही है। नक्सली ग्रामीणों में अपना भय पैदा करने, डरा धमकाकर अपने ऐजेंड में शामिल करने और निर्माण सहित तेंदुपत्ता कार्यो में वसुली करने के लिए ऐसी घटना कारित कर दहशत फैलाना चाहते है, ताकि उनका भय बना रहा है। इस मामले में घटना के बाद जंगलो में फरार नक्सलियों की तलाश के लिए सर्चिंग की जा रही है।