भोपाल, डेस्क रिपोर्ट| कोरोना संकट (Corona Crisis) के चलते मध्य प्रदेश (Madhyapradesh) में मार्च महीने से स्कूल (School) बंद हैं| ऐसे में निजी स्कूलों पर आर्थिक संकट गहरा गया है| स्कूलों के संचालकों के साथ स्कूलों से जुड़े कर्मचारियों की स्थिति बेहद ख़राब हो चली है| ऐसे में सरकार से आर्थिक सहायत देने की मांग उठी है| शनिवार को मध्यप्रदेश प्रांतीय अशासकीय शिक्षण संस्था संघ ने इस सम्बन्ध में पत्रकार वार्ता की| संघ ने बताया कि 21 दिसंबर को बोर्ड ऑफिस चौराहे से सीएम हाउस तक अपनी मांगों को लेकर शांति मार्च निकाला जाएगा|

मध्यप्रदेश प्रांतीय अशासकीय शिक्षण संस्था संघ का कहना है कि पिछले साढ़े आठ महीने से निजी स्कूलों के बंद रहने से स्थिति बेहद खराब हो गई है। स्कूलों की बिगड़ती व्यवस्था का मुद्दा उठाकर, सरकार से जल्द स्कूल खोलने, हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार शिक्षण शुल्क जमा करने के आदेश निकालने एवं बिजली बिल, स्कूलों बसों के बीमा परमिट की फीस से राहत दिलाने की मांग की है।

संघ के प्रदेश प्रवक्ता ज्ञानेंद्र दुबे ने कहा कि 21 दिसंबर को बोर्ड ऑफिस चौराहे से सीएम हाउस तक शांति मार्च करेंगे। निजी स्कूल संचालकों की पीड़ा है कि कोरोना के चलते स्कूल बंद हैं, लेकिन स्कूलों में संलग्न बसें आठ महीनों से खड़ी हुई है, अधिकांश बसें लोन पर हैं, इनकी किस्त स्कूल संचालकों को देनी पड़ रही है। वहीं इन बसों के बीमे से लेकर परमिट तक की राशि स्कूल संचालकों को चुकानी पड़ रही है। इसे शासन को माफ करना चाहिए। संघ ने कहा सरकार को निजी स्कूलों सहायता देने पर विचार करना चाहिए|