गुटबाजी का शिकार कांग्रेस का मीडिया विभाग, नेताओं ने समर्थकों को सौंपी जिम्मेदारी

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भोपाल। प्रदेश कांगे्रस का मीडिया विभाग पार्टी हाईकमान के निशाने पर आ गया है। विधानसभा चुनाव के दौरान मीडिया विभाग की ओर से पार्टी के दिग्गज नेताओं को नजरअंदाज कर दिया है। जिसकी वजह से पार्टी नेताओं को अपने समर्थकों को मीडिया की जिम्मेदारी सांैपी गई है। कांग्रेस मीडिया विभाग की ओर से पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ, राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी एवं पीसीसी में होने वाली पत्रकार वार्ता के समाचार जारी किए जाते हैं, जबकि सांसद सिंधिया, दिग्विजय सिंह समेत अन्य स्टार प्रचारकों को कांग्रेस का मीडिया विभाग तवज्जों नहीं दे रहा है। 

विधानसभा चुनाव के दौरान एक ओर कांग्रेस का मीडिया विभाग का कामकाज बेहद ढीला है। प्रदेश कांगे्रस मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा मीडिया को मैनेज करने की बजाए पार्टी में विज्ञापन से लेकर अन्य आर्थिक मामलों में रुचि ले रही हैं। मीडिया विभाग की जिम्मेदारी मिलने के बाद से अभी तक वे मीडिया में पहचान बनाने में सफल नहीं हो पाई हैं, जिसका पार्टी को फायदा मिल सके। वहीं दूसरी ओर भाजपा का मीडिया सेंटर हाईटेक तरीके से काम कर रहा है। इसके मुकाबले मीडिया प्रबंधन में कांग्रेस बेहद कमजोर साबित हुई है। कांग्रेस मीडिया विभाग की गंभीर उदाशीनता की वजह से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की छवि खराब हुई है। 

समर्थक जारी करते हैं नेताओं के कार्यक्रम

भारतीय जनता पार्टी जहां प्रदेश भर में सभी स्टार प्रचारकों की सभाओं के कार्यक्रम प्रदेश कार्यालय की ओर से एक साथ जारी करती हैं। हर पत्रकारवार्ता का समाचार जारी होता है। वहीं कांग्रेस सिर्फ चुनिंदा नेताओं की सभाओं के समाचार जारी करती है। जिसकी वजह से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की सभाओं से जुड़े समाचार उनके समर्थक जारी करते हैं। दिग्विजय सिंह के समचार उनके समर्थकों की ओर से जारी किए जाते हैंं। बुदनी विधानसभा में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ विधानसभा चुनाव लड़ रहे पूर्व पीसीसी अध्यक्ष अरुण यादव का पीसीसी की ओर से एक भी समाचार जारी नहीं होता। ऐसे में यादव के समर्थक एवं पूर्व मीडिया इंचार्ज केके मिश्रा यह जिम् मेदारी निभा रहे हैं। यही वजह है कि कांग्रेस के मीडिया विभाग की लापरवाही की वजह से वरिष्ठ नेताओं कि किरकिरी हो रही है।