रूह वही रहती है, जुबां का रूप बदल जाता है: तलत अज़ीज़

भोपाल। खान अशु।

जमाने बदलते हैं, रिवाज बदलते हैं, जुबां भी बदल जाती हैं… पुराने लफ्जों की जगह नए शब्द प्रचलन में आ जाते हैं और नए अल्फाज अदब से लेकर आम बोलचाल तक में अपना स्थान भी बना लेते हैं लेकिन इनकी असल रूह हमेशा कायम रहती है और वह बखूबी अपना काम हर दौर में करती रहती है।

मशहूर गजल गायक तलत अजीज ने यह बात कही। वे शुक्रवार को भोपाल में मौजूद थे। एशिया की सबसे बड़ी मस्जिद ताजुल मसाजिद में नमाज-ए-जुमा अदा करने का मोह वे नहीं छोड़ पाए। नमाज से फारिग होकर उन्होंने कहा कि मेरे लिए फख्र और खुशी की बात है कि मैं आज इस तारीखी मस्जिद की साया में नमाज अदा कर पाया हूं। उन्होंने बात को जारी रखते हुए कहा कि शहर-ए-भोपाल एक ऐसी जगह है, जो हर उस शख्स को अपनी तरफ आकर्षित करता है, जो यहां आया हो। उन्होंने कहा कि यहां की आब-ओ-हवा, यहां के रिवाज, यहां के लोगों की मिलनसारिता और यहां के सुकून को यादगार बताते हुए कहा कि यहां जो आता है, बार-बार आते रहने का अहद साथ लेकर जाता है। तलत ने कहा कि दुनिया का मिजाज बदल रहा है, सुनने-सुनाने और कहने-सुनने का रिवाज बदलता जा रहा है, लेकिन गजल एक ऐसी विघा है, जो हमेशा से लोगों की पसंद में शामिल थी, और हमेशा इसका जलवा कायम रहने वाला है। देश-दुनिया में अपने फन की तारीफ और दाद पा चुके तलत को शहर-ए-भोपाल की अवाम का सुनना भी बहुत पसंद आया। उन्होंने कहा कि यहां के श्रोता में शेर-ओ-गजल की समझ भी है और मेहमान बनकर आए कलाकार को इज्जत और दाद देने में भी उनका हाथ और दिल खुला हुआ है। तलब अजीज कहते हैं कि फिल्मों से लेकर आम मंच तक वे अपनी गजलों से लोगों के बीच जाते रहे हैं और जा रहे हैं, उनके कलाम को पसंद किया जाता है, यह श्रोताओं और कला के कद्रदानों का उनपर बड़ा ईनाम है। तलत ने नई पीढ़ी को संदेश देते हुए कहा कि जो भी करें दिल से करें, मेहनत से करें, शौक के साथ करें और सबको पसंद आने जैसा करें, मेहनतों और चाहतों में बड़ा असर होता है, कामयाबी इसी के रास्ते चलकर आती है।

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