संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रों का भविष्य अधर में, ठप हुई पढ़ाई

भोपाल, संदीप सिंह। केंद्र सरकार की अनदेखी राजधानी स्थिति केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्रों के भविष्य पर भारी पड़ती नजर आ रही है। हालात यह है कि इस कारण छात्रों का पाठ्यक्रम पूरा होने की जगह अभी तक आधा भी नहीं हो पाया है। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के भोपाल परिसर में 2020-21 सत्र की पढ़ाई पूरी ठप है। जबकि यूजीसी के आदेशानुसार 31 अगस्त तक सत्र समाप्त हो जाना चाहिए था। लेकिन अधिकांश विषयों का पाठ्यक्रम 20 फीसदी ही पूरा हो पाया है। इसकी मुख्य वजह केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय भोपाल में अतिथि और संविदा प्राध्यापकों की पुनः बहाली ना होना है।

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केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के देश में 13 परिसर हैं। इनमें से 11 में व्याकरण, ज्योतिष वेद, वेदांत, साहित्य, न्याय के साथ हिंदी, अंग्रेजी, कंप्यूटर, इतिहास इत्यादि की पढ़ाई कराई जाती है। भोपाल परिसर में 50 फीसदी प्राध्यापक अतिथि और संविदा की अस्थायी व्यवस्था पर पढ़ाते हैं जिन्हें हर वर्ष शिक्षण सत्र के अंत में एक माह का ब्रेक दिया जाता है। एक माह के बाद पुनः बहाली कर दी जाती रही है। लेकिन इस वर्ष ब्रेक देने के बाद इन अस्थायी प्राध्यापकों की पुनः नियुक्ति नहीं हो पाई है। इसका मुख्य कारण कुलपति का ना होना बताया जा रहा है। भोपाल परिसर के प्रभावित अस्थायी प्राध्यापकों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र भेजकर मांग की है कि विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति से पहले इन अस्थायी प्राध्यापकों की पुनः बहाली की जाए जिससे शैक्षणिक सत्र की पढ़ाई बिना व्यवधान के पूरी की जा सके। साथ ही इन प्राध्यापकों को अपने परिजनों के पालन पोषण में हो रही असुविधा से बचाया जा सके।

छात्रों का कहन है कि इस महामारी की स्थिति में केंद्रीय संस्कृत संस्थान के सभी अध्यापकों ने ऑनलाइन शिक्षा देकर बहुत बड़ा सहयोग किया परंतु कुछ समय से शिक्षकों की बहाली के कारण हमारी ऑनलाइन क्लास भी स्थगित कर दी गई। जिसका प्रभाव सभी छात्र पर पड़ रहा है इसलिए सरकार से आग्रह है की जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान कर हमारी कक्षा पुन: प्रारंभ की जाए। इनका कहना है कि कुलपति एवं अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति जल्दी से जल्दी करनी चाहिए, जिससे छात्रों की पढाई में व्यवधान ना हो।