शराब माफिया की सिफारिश पर दागी अधिकारी की तैनाती की तैयारी

-Preparation-of-the-tainted-officer-deployment-on-the-recommendation-of-Alcohol-Mafia

भोपाल| मध्य प्रदेश में सरकार भले ही बदल गई हो लेकिन अधिकारियों के तौर तरीके और रवैये में कोई बदलाव नहीं आ रहा है। ताजा मामला आबकारी विभाग का है जिसमें मलाईदार माने जाने वाले धार जिले में पोस्टिंग को लेकर विवाद के एक अति सक्रिय दागी अधिकारी की पदस्थापना के लिए अंचल का एक शराब माफिया सक्रिय हो गया है। वर्तमान में देवास जिले में पदस्थ सहायक आबकारी आयुक्त संजीव दुबे ने अपनी पदस्थापना को लेकर अब मुख्य मंत्री कमलनाथ तक का दरवाजा खटखटा दिया है और इस काम में उसकी मदद अंचल का एक शराब माफिया कर रहा है। 

दरअसल शराब माफिया के संबंध में कमलनाथ की किचन कैबिनेट में पदस्थ  व्यक्ति से है जिसके साथ इस व्यक्ति के कारोबारी रिश्ते हैं। संजीव दुबे वही अधिकारी है जिस पर इंदौर में शराब माफियाओं के साथ गठजोड़ कर सरकार को 42 करोङ रुपए के राजस्व का नुकसान पहुंचाने का आरोप है | इस मामले में दिलचस्प पहलू यह है कि सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद अभी तक बाइस करोड रुपए की रिकवरी नहीं हो पाई है। इस मामले में संजीव दुबे सहित कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था लेकिन भाजपा सरकार में रसूख के चलते संजीव ने न केवल अपनी बहाली करा ली बल्कि देवास जैसे जिले में पदस्थापना तक करा डाली जबकि शासकीय नियमों में साफ उल्लेख है कि गंभीर विभागीय जांच के चलते किसी भी अधिकारी को मैदानी पदस्थापना नहीं दी जा सकती। ऐसा नहीं कि संजीव के खिलाफ यह पहला मामला हो ।पहले भी कई मामलों में संजीव आरोपों के घेरे में है और विदिशा, रतलाम व धार जिलों में रहते हुए शासकीय राजस्व को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया है। लेकिन भाजपा नेताओं से नजदीकी के चलते संजीव का बाल बांका भी ना हुआ। 2004 में विदिशा जिले में फंसे हुए संजीव ने कई शराब दुकानदारों से बिना लाइसेंस फीस जमा कराएं उन्हें दुकानें आवंटित कर दी थी जिसके चलते सरकार को लगभग पैसठ लाख रू के राजस्व का नुकसान हुआ। इस मामले में संजीव को आरोप पत्र जारी हुआ था। 

हैरत की बात यह है कि पैसठ लाख की गंभीर आर्थिक क्षति के बाद भी सरकार ने संजीव के रसूख के चलते उसे केवल एक वेतन वृद्धि रोक कर दंडित किया  और बाद में दूसरे आबकारी आयुक्त ने इस सजा को भी माफ कर दिया जबकि इस सजा को माफ करने के अधिकार केवल शासन को थे। रतलाम में पदस्थ रहते हुए ही भी संजीव के ऊपर शासन को 75 लाख रू का नुकसान होने की शिकायत की गई थी जिस पर सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। 

दरअसल रतलाम ,आलोट और जावरा में ठेकेदारों को पक्ष में राशि जमा न करने के बावजूद भी शराब  प्रदाय कर दी गई थी जो शासकीय नियमों का सरासर उल्लंघन था। लेकिन संजीव के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई। इस मामले में अवैध शराब का ट्रक पकड़े जाने पर आरोपियों के खिलाफ सीजेएम न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए इनकी आबकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत की पुष्टि की थी। धार जिले में भी अवैध शराब से भरा ट्रक ठीकरी थाने में पकड़ा गया था लेकिन इस मामले में भी कोई कार्यवाही नहीं हुई थी।  हैरत की बात यह है कि भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार और कुशासन के खिलाफ चुनाव लड़कर सत्ता में आई कांग्रेस ने भ्रष्टाचार का जीरो टोलरेंस और स्वच्छ प्रशासन जैसे वादे जनता से किए थे। लेकिन अब संजीव दुबे जैसे अधिकारियों की प्राइम पोस्टिंग भी बताती है कि सरकार तो बदल गई लेकिन कुछ नहीं होता|