रिपोर्ट में खुलासा: शिशु मृत्यु दर में मध्‍यप्रदेश फिर अव्वल

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भोपाल। शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और कुपोषण को मिटाने प्रदेश में लाखो करोड़ों खर्च के बाद स्तिथि नहीं बदली| मध्‍यप्रदेश शिशु मृत्यु दर में फिर अव्वल रहा है। यह खुलासा सैम्पल रजिस्ट्रेशन सर्वे में हुआ है| केंद्र सरकार द्वारा शुक्रवार को जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम(एसआरएस) की साल 2017 की रिपोर्ट में  मप्र एक बार फिर देश में सबसे ज्यादा शर्मनाक स्थिति में है। इस रिपोर्ट ने मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए किये गए सभी प्रयासों की पोल खोल दी है| 

शिशु मृत्यु दर में मध्य प्रदेश के आंकड़े हैरान करने वाले हैं. देश में सबसे ज़्यादा शिशुओं की मौत मध्य प्रदेश में हो रही है| रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रदेश में एक हजार में से 47 बच्चे जन्म के बाद एक साल तक जीवित नहीं रह पाते हैं।  बीते 15 सालों से भारत में शिशु मृत्यु दर मप्र में सबसे ज्यादा बनी हुई है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक मप्र के शहरों में शिशु मृत्यु दर 32 है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 51 दर्ज की गई है। रिपोर्ट में चौंकाने वाली बात यह है कि बेटियों के मुकाबले बेटों की मृत्यु दर ज्यादा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मध्य प्रदेश में हर साल जन्में 1000 मेल शिशुओं में से 48 की मौत एक साल के भीतर हो जाती है। फीमेल शिशु में यह दर 45 है। साल 2014 की रिपोर्ट में यह दर क्रमश: 51 व 53 थी।