तीन साल से बंद गनपति खदान में चाचा और भतीजे के शव मिलने से सनसनी

पुलिस के अनुसार दोनों मृतक गत 10 अक्टूबर से घर से गायब थे, परिजनों के द्वारा गत 15 अक्टूबर को परासिया पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी

छिंदवाड़ा, विनय जोशी| पेंच क्षेत्र की 3 वर्षों से बंद भूमिगत कोयला खदान न्यूटन गनपति में शनिवार की सुबह दो शव पाए गए। मृतक खदान के समीप बने मकानों में रहते थे। जिसमें चाचा अर्जुन कठौते 30 वर्ष एवं भजीता राजेन्द्र कठौते 28 वर्ष के रूप में पहचान की गई है।

पुलिस के अनुसार दोनों मृतक गत 10 अक्टूबर से घर से गायब थे। परिजनों के द्वारा गत 15 अक्टूबर को परासिया पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। दोनों के शव 1 सप्ताह पुराने बताए गए हैं। शवो के गल जाने के कारण शवो से बदबू काफी आ रही थी। हालांकि पुलिस में दोनों की मौत को लेकर फिलहाल कुछ भी नहीं बताया है। दोनों की मौत क्या हत्या है या अन्य कारणों से मौत हुई है इस बारे में प्राथमिक तौर पर पुलिस की जांच की कार्यवाही में कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है। इस बारे में एसडीओपी अनिल शुक्ला ने बताया कि प्रथम दृष्टया शव को देखने पर चोट के कोई निशान दिखाई नहीं दिए हैं।

दोनों की मौत कैसे हुई इस बात का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही हो पाएगा। शव एक हफ्ता पुराना है और रासायनिक परीक्षण के लिए छिंदवाड़ा से प्रयोगशाला की टीम भी आई। जानकारी के अनुसार खदान के मोहरे पर मृतकों की चप्पल मिली है। दोनों मृतक के शव मोहरे से 20 फीट की दूरी पर कैसे पड़े रहे यह एक रहस्य बना हुआ है। इस बात की भी चर्चा है कि बंद खदान से बंद खदान के मोहरे पर लोहे का मजबूत गेट लगा हुआ है। लेकिन जिसमें से रोड निकाल दी गई है। क्या मृतक खदान के भीतर जाकर लोहा चोरी करते थे या फिर जहरीली गैस के प्रभाव से कुछ हुआ है। हालांकि एसडीओपी का कहना है कि मोहरे के अंदर मजबूत दीवार भी खड़ी की गई है।

जानकार सूत्रों ने बताया कि गनपति भूमिगत खदान को गत 3 अगस्त 2017 में बंद किया गया है। खदान में कार्यरत 286 कर्मचारियों में से अधिकांश कर्मचारियों को दूसरी खदानो में तबादला कर दिया गया है। लेकिन वर्तमान में 67 कर्मचारी अभी भी कार्यरत हैं। जिसमें कि आधे कर्मचारी प्रथम पाली में खदान में आते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि मोहरे के अंदर एक सप्ताह भर से दो शव पड़े रहे जिससे काफी बदबू आती रही लेकिन किसी भी कर्मचारी को इस बात का पता नहीं लगा। कहा जाता है कि कर्मचारी नौकरी पर तो आते हैं लेकिन हाजिरी लगाकर घर चले जाते हैं। दूसरी और खदान में अभी भी ऊपरी भाग में लोहा सहित बहुत सी सामग्री पड़ी हुई है। संपत्ति की सुरक्षा के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवान भी तैनात हैं। लेकिन उनको भी इस बात की जानकारी नहीं लगी। शव मिलने की सूचना पर खान प्रबंधक शशिकांत साहू और रेस्क्यू टीम पहुंची। बहरहाल यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मौत के कारणों का पुलिस खुलासा करेगी। दोनों शव कहीं और से लाकर खदान के भीतर तो नहीं डाला गया या फिर दोनों की मौत खदान के अंदर ही हुई है। यह जांच का विषय है।

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