दतिया में नहीं थम रहा अवैध रेत का काला कारोबार, पुलिस-प्रशासन बेपरवाह

दतिया, सत्येन्द्र सिंह रावत। प्रदेश में 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में 16 सीटें ग्वालियर चंबल संभाग इलाके में है, जहां अवैध रेत उत्खनन चरम पर है। उपचुनाव से पहले पूर्व मंत्री गोविंद सिंह की भिंड और दतिया में सिंध नदी बचाओ अभियान की पूर्णाहुति कुछ समय पहले ही समाप्त हुई है लेकिन रेत माफियाओं और पुलिस व प्रशासन को इससे कोई सरोकार नहीं। वहीं कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंच से स्पष्ट रूप से कहा है कि अवैध रेत उत्खनन पर शिकंजा कसना जरूरी है, बावजूद इसके दतिया जिले के गोराघाट थाना क्षेत्र के ग्राम पाली से निकली सिंध नदी का सीना छलनी कर अवैध रूप से पनडुब्बी डालकर रेत निकाल रहे हैं। ये काम रात के अंधेरे पूरा फायदा उठाते हुए पुलिस संरक्षण में संचालित होता है।

माइनिंग कॉर्पोरेशन एवं एनजीटी ने नदियों में जीव जंतुओं को बचाने के लिए 31 अक्टूबर तक रेत उत्खनन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया है।  लेकिन रेत माफियाओं और पुलिस की सहभागिता से यह आदेश हवाहवाई होते नजर आ रहे हैं। बारिश रुकते ही वन विभाग के रास्तो से होते हुए अवैध खुदाई कर ट्रैक्टर ट्रॉली की सहायता से सिंध नदी में पनडुब्बी डालकर 50 फुट गहराई से रेत निकाली जा रही है। इस रेत का अवैध परिवहन कर क्षेत्र की पंचायतों और दतिया शहर में बिक्री के लिए पहुंचाई जा रही है।

बता दें जबलपुर हाईकोर्ट द्वारा भी अवैध रेत उत्खनन में पकड़े गए वाहन चालक और मालिक पर रेत चोरी के मामले में धारा 379 के आदेश पुलिस को दिए गए थे, साथ ही माइनिंग कॉर्पोरेशन विभाग को भी बिना रॉयल्टी खनन करते हुए या परिवहन करते हुए पाए जाने पर गौण खनिज अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के अधिकार प्राप्त हैं। लेकिन इसके बाद भी इन रेत माफियाओं पर ना तो माइनिंग विभाग की कोई कार्रवाई देखने को मिलती है और ना ही पुलिस के आला अधिकारियों का क्षेत्र के पुलिस थानों पर कोई दबाव रहता है। ऐसे में क्षेत्र में अवैध रेत कारोबार खूब फलफूल रहा है और फिलहाल इसपर रोक लगती नहीं दिख रही।

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