स्कूल चलें हम अभियान 2024: कलेक्टर बनीं टीचर, बालिकाओं को बताया सफलता का “थ्री-पी” फॉर्मूला, भोजन भी किया, रोटी मोटी होने पर हुईं नाराज

कलेक्टर श्रीमती चौहान ने कहा "थ्री पी" फॉर्मूला में पहली पी से आशय है पर्सिवियरेंस (दृढ़ता के साथ सतत प्रयास), दूसरी पी का मतलब है पॉजिटिविटी (सकारात्मकता) और तीसरी पी से आशय है प्रेयर (प्रार्थना) । उन्होंने "थ्री पी" फॉर्मूला पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि हम दृढ़तापूर्वक व सकारात्मक सोच के साथ लक्ष्य हासिल करने के लिये सतत प्रयास करें, तो सफलता अवश्य मिलेगी।

Atul Saxena
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School Chalen Hum Abhiyaan Gwalior
स्कूल चलें हम अभियान 2024 : स्कूलों में नए सत्र से प्रवेश से पहले बच्चों के लिए चलाये गए तीन दिवसीय स्कूल चलें हम अभियान के अंतिम दिन आज “भविष्य से भेंट” कार्यक्रम आयोजित किया गया, इसके तहत प्रशासकीय अधिकारी अलग अलग स्कूलों में पहुंचे और एक शिक्षक की भूमिका निभाते हुए बच्चों को मोटिवेट किया, कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिंदे की छावनी पहुंचीं और उन्होंने यहाँ सफलता का “थ्री-पी” फॉर्मूला बताया, कलेक्टर ने मध्यान्ह भोजन भी किया और रोटियां मोती होने पर नाराजगी भी जताई
कलेक्टर रुचिका चौहान आज टीचर और मोटिवेटर दोहरी भूमिका में दिखाई दीं,  उन्होंने बालिकाओं से कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। लक्ष्य निर्धारित कर सतत प्रयास करने से सफलता हासिल होती है। उन्होंने “थ्री पी” फॉर्मूला के जरिए बालिकाओं को सफलता का मंत्र बताया। साथ ही बालिकाओं का पुष्पाहारों से स्वागत किया, उपहार भेंट किए और उनके साथ भोजन भी किया।

कलेक्टर ने सफलता का “थ्री-पी” फॉर्मूला बताया

कलेक्टर श्रीमती चौहान ने कहा “थ्री पी” फॉर्मूला में पहली पी से आशय है पर्सिवियरेंस (दृढ़ता के साथ सतत प्रयास), दूसरी पी का मतलब है पॉजिटिविटी (सकारात्मकता) और तीसरी पी से आशय है प्रेयर (प्रार्थना) । उन्होंने “थ्री पी” फॉर्मूला पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि हम दृढ़तापूर्वक व सकारात्मक सोच के साथ लक्ष्य हासिल करने के लिये सतत प्रयास करें, तो सफलता अवश्य मिलेगी। साथ में मन की मजबूती के लिये अपने माता-पिता, ईश्वर, प्रकृति या गुरूजन जिसके प्रति भी श्रद्धा हो उसकी प्रार्थना करना चाहिए। इससे एकाग्रता आती है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

मुझे ख़ुशी होगी जब इस स्कूल की कोई बच्ची IAS बनेगी 

कलेक्टर श्रीमती चौहान ने बच्चों से यह भी कहा कि कड़ी मेहनत व प्रयास के बाबजूद कई बार हम असफल होते हैं तो  इससे निराश नहीं होना चाहिए। जीवन से बड़ी कोई सफलता नहीं होती। इसलिए लगातार प्रयासरत रहकर लक्ष्य की ओर बढ़ते रहें। उन्होंने बालिकाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि मुझे तब बहुत खुशी होगी जब इस विद्यालय की कोई बालिका आईएएस होगी अथवा किसी और क्षेत्र के बड़े औहदे पर पहुँचेगी।

बालिकाओं के साथ बैठकर किया मध्यान्ह भोजन

जयेन्द्रगंज में संजय कॉम्प्लेक्स के समीप संचालित शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय शिंदे की छावनी में स्कूल चलें हम अभियान के तहत पहुँचीं कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने स्कूल की बालिकाओं के साथ बैठकर मध्यान्ह भोजन भी किया। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता में और सुधार लाने के लिये संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्हें जब रोटियां मोटी दिखाई दीं तो वे नाराज हुईं और कहा कि ये पाटली होनी चाहिए इस अवसर पर जिला परियोजना समन्वयक रविन्द्र सिंह तोमर, विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती नवोदिता गुप्ता व अन्य शिक्षकगण एवं स्कूली बालिकायें व उनके अभिभावक मौजूद थे।

अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी विभिन्न स्कूलों में “भविष्य से भेंट” कार्यक्रम में शामिल हुए 

स्कूल चलें हम अभियान के तीसरे और अंतिम दिन यानि गुरुवार को जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भविष्य से भेंट कार्यक्रम के तहत विभिन्न स्कूलों में पहुँचे। इस दौरान अधिकारियों ने बच्चों का स्वागत सत्कार किया, उन्हें उपहार सौंपे और प्रेरणादायी उदबोधन दिया। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विवेक कुमार शासकीय गजराराजा कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लश्कर के प्रवेशोत्सव में शामिल हुए। इसी तरह संयुक्त संचालक लोक शिक्षण दीपक पाण्डेय ने शासकीय माध्यमिक विद्यालय रतवाई, संयुक्त कलेक्टर संजीव जैन ने शासकीय कन्या उमावि सिकन्दर कम्पू, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी एच के सिंह ने अवाड़पुरा स्कूल एवं जिला परियोजना समन्वयक रविन्द्र सिंह तोमर ने शासकीय हाईस्कूल रेशम मिल में पहुँचकर भविष्य से भेंट कार्यक्रम के तहत बच्चों के बीच पहुँचे। सभी ने बच्चों का स्वागत किया और उपहार भेंट करने के बाद उन्हें सफलता के मंत्र बताए।

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पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं ....

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