Damage-to-Ayushman-scheme-

होशंगाबाद| शिव मोहन सिंह| यह दो चित्र इस बात के गवाह हैं की केंद्र सरकार हो अथवा राज्य सरकार उसकी योजनाओं को पलीता कैसे लगाया जाता है | यह दोनों व्यक्ति बनखेड़ी मैं दुर्घटना में घायल होने के बाद नर्मदा ट्रामा सेंटर हबीबगंज भोपाल में भर्ती है जिन्हें बगैर पूछताछ किए भर्ती कर लिया गया| अज्ञानता के कारण 4 दिन बाद प्रबंधन से संपर्क साधने पर बमुश्किल इनके आयुष्मान कार्ड बनाए गए उसमें भी चित्र नंबर 1 हरगोविंद पटेल को सिर्फ 25% राहत दी गई जबकि राधेश्याम ठाकुर जो आदिवासी वर्ग से है को योजना का लाभ देने से इंकार कर दिया गया |

आयुष्मान स्टेट हेड जेपी अस्पताल भोपाल को प्रकरण की जानकारी दिए जाने के बाद  अब दोनों पेशेंट को आयुष्मान योजना का पूर्ण लाभ मिलने की संभावना है | साथ ही स्टेट हेड द्वारा अस्पताल के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्यवाही किए जाने का भी आश्वासन दिया गया है | यह सिर्फ एक नजीर है गरीबों के लिए लांच की गई आयुष्मान योजना सख्त शासकीय मॉनिटरिंग के अभाव में परवान चढ़ते हुए नहीं दिख रही है| इसके पूर्व भी इस प्रकार के प्रकरणों से 2/ 4 होने के बाद ही हितग्राहियों को लाभ मिल सका | इस योजना के अधिकतर हितग्राही ग्रामीण क्षेत्रों में ही निवास करते हैं और उनकी अज्ञानता का फायदा निजी चिकित्सालय उठा रहे हैं या कहें कि शासन से योजना में टाई अप करने के बाद महज औपचारिकता का निर्वहन कर रहे हैं समझ में नहीं आता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कि इस महत्वाकांक्षी गरीब हितैषी योजना को लागू करवाने में पार्टी के लोग ही रुचि क्यों नहीं ले रहे है और बगैर जनभागीदारी के यह योजना गरीबों तक पहुंच पाएगी इसमें संशय है दुख का विषय तो यह है जिस अस्पताल का मैंने जिक्र किया है वह भी पार्टी के लोगों द्वारा ही संचालित है |