Indore News : सरकारी स्कूलों की हालत खस्ता, ना तो बैठने के लिए कुछ सुविधा, ना ही पंचायत के पास फंड

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Indore News : आज भी गांव के सरकारी स्कूलों की हालत बदतर है। बच्चे टेबल कुर्सी की बजाय दरी बिछाकर पढ़ने बैठते हैं। दरअसल गांव की हालत और समस्या को जानने के लिए जैन दिवाकर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा आज बाईग्राम का दौरा किया गया। इस दौरान उन्होंने यह देखा कि सरकारी स्कूलों की हालत अभी भी खस्ता है। यहां बच्चे बैठने के लिए टेबल कुर्सी का नहीं बल्कि दरी का इस्तेमाल करते हैं, हालांकि कई जगह पर दरी भी उपलब्ध नहीं है।

जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय सेवा योजना एनएसएस के अंतर्गत तीन दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया है। जिसके तहत विद्यार्थियों द्वारा ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में बताया जा रहा है और उन्हें जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा बच्चों को स्कूल जाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इसी के चलते आज बाईग्राम के स्कूल और आंगनवाड़ी की व्यवस्था का जायजा लिया गया। ऐसे में काफी ज्यादा खराब हालत यहां देखने को मिली।

विद्यार्थियों द्वारा बताया गया है कि सरकारी स्कूल गांव में बने हुए हैं लेकिन उनकी हालत काफी ज्यादा खस्ता और जर्जर है। स्कूल के पास ही बना पंचायत भवन काफी ज्यादा सुंदर है, वहां नियमित रूप से सफाई होती है, टेबल कुर्सी भी है और कंप्यूटर सिस्टम भी उपलब्ध है। लेकिन वहीं सरकारी स्कूल में ऐसी एक भी सुविधा उपलब्ध नहीं है, ना तो बैठने के लिए कुछ उपलब्ध है और ना ही टेबल कुर्सी है। ऐसे में सरकारी स्कूलों का सिस्टम कितना ज्यादा खस्ता है अंदाजा लगाया जा सकता है।

विद्यार्थियों ने यह भी बताया कि स्कूलों में सरकार द्वारा नियुक्त किए गए शिक्षक हैं। लेकिन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए किताब नहीं है। वहीं पंचायत के पास भी सरकारी स्कूल को चलाने के लिए कोई भी फंड नहीं है। ऐसे में बच्चे खुद ही स्कूल परिसर में साफ सफाई करते हैं और वही बैठ कर पढ़ाई करते हैं। विद्यार्थियों द्वारा यह भी बताया गया है कि कक्षाओं में बिजली के तार खुल्लम-खुल्ला पड़े हुए हैं, ऐसे में कभी भी कोई भी दुर्घटना होने की संभावना है। वहीं शौचालय में काफी ज्यादा गंदगी है ऐसे में वहां जाना भी दुश्वार हो जाता है।

इसके अलावा भोजनालय में भी काफी ज्यादा गंदगी आज देखने को मिली। विद्यार्थियों द्वारा यह भी बताया गया है कि स्कूल के ठीक बाहर एक डब्बा रखा गया है जिसमें शराब की बोतल खट्टे की जाती है। लेकिन छोटे बच्चों के लिए पोस्टिक आहार की व्यवस्था ठीक से नहीं है, ना तो बच्चों को ठीक से खाना मिलता है और ना ही आंगनवाड़ी के बच्चों को अच्छा खाना खिलाया जाता है।

आंगनबाड़ी के सुपरवाइजर इंदौर में रहती है, लेकिन वहां आंगनवाड़ी नहीं आती है और अपनी जगह किसी और महिला को भेज देती है। आंगनवाड़ी का जब दौरा किया गया तो यह देखा गया कि ना तो आंगनवाड़ी में कोई मेडिकल सुविधा उपलब्ध है और ना ही कोई जल व्यवस्था उपलब्ध है। बस आंगनवाड़ी में एक सरकारी कुआं बना हुआ है, जहां का पानी पीने के लिए इस्तेमाल में लिया जाता है, लेकिन यहां काफी ज्यादा गंदगी है उसका पानी भी पीने और स्माल करने योग्य नहीं है।


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Ayushi Jain

मुझे यह कहने की ज़रूरत नहीं है कि अपने आसपास की चीज़ों, घटनाओं और लोगों के बारे में ताज़ा जानकारी रखना मनुष्य का सहज स्वभाव है। उसमें जिज्ञासा का भाव बहुत प्रबल होता है। यही जिज्ञासा समाचार और व्यापक अर्थ में पत्रकारिता का मूल तत्त्व है। मुझे गर्व है मैं एक पत्रकार हूं। मैं पत्रकारिता में 4 वर्षों से सक्रिय हूं। मुझे डिजिटल मीडिया से लेकर प्रिंट मीडिया तक का अनुभव है। मैं कॉपी राइटिंग, वेब कंटेंट राइटिंग, कंटेंट क्यूरेशन, और कॉपी टाइपिंग में कुशल हूं। मैं वास्तविक समय की खबरों को कवर करने और उन्हें प्रस्तुत करने में उत्कृष्ट। मैं दैनिक अपडेट, मनोरंजन और जीवनशैली से संबंधित विभिन्न विषयों पर लिखना जानती हूं। मैने माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से बीएससी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन किया है। वहीं पोस्ट ग्रेजुएशन एमए विज्ञापन और जनसंपर्क में किया है।

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