मिट्टी के दियो, जेली और मोममबत्ती दियो पर चायना दियो की मार

इंदौर। आकाश धौलपुरे। 

दीपोत्सव की तैयारी जोरों पर है ऐसे में बाजार भी गर्मजोशी से गुलजार नजर आ रहे है हालांकि ये बात ओर है कि खरीददारी का असर बाजार पर कम देखने को मिल रहा है बावजूद इसके विक्रेताओं को उम्मीद है कि अंतिम सप्ताह में बाजार में तेजी देखने को मिलेगी। दीपोत्सव में खास तौर पर आधुनिक दियो का चलन बीते कुछ सालों में बढ़ा है लेकिन इस वर्ष इन दियो का मुकाबला चायना मेड दियो से है जो पारम्परिक मिट्टी, के दिये, मोमबत्ती और जेली के डिजाइनर दियो की तुलना में सस्ते और थोड़े आकर्षक भी है। दरअसल, आधे मध्यप्रदेश में इंदौर से मोमबत्ती और मिट्टी और जैली से निर्मित आकर्षक दियो की पूर्ति की जाती है लेकिन इस बार हल्की सी मंदी कि मार और चायना के उत्पादों ने मुश्किलें बढ़ा दी बावजूद इसके आखरी समय पर विक्रेताओं को उम्मीद है कि दियो का बाजार गुलजार होगा। इस बार बाजार में आकर्षक पारम्परिक दीये तो बिक ही रहे है वही लोगो के आकर्षण का केंद्र मोमबत्ती और जेली दिए भी है। मोम और जैली के दियो पर बेहतर तरीके से कलाकारी की गई है जिनसे दीये और चमक बिखेरने को तैयार है। जैली के दिये तो अलग अलग तरह से ढंके गए जो दिखने बे बेहद खूबसूरत नजर आते है। इन दियो को खरीदने वाले भी इनके गुणगान करते नही थकते है। इंदौर की शालिनी दुबे की माने तो घर को आकर्षक तरीके से सजाने में कैंडल और जैली के दिये सहायक होते है और इसलिये वो साल इन्हें खरीदती है। वही दियो के थोक विक्रेता राजकुमार अग्रवाल की माने तो पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष, मंदी के असर और चायना उत्पादों के चलते बिक्री आधी रह गई है लेकिन उम्मीद है दीपावली के पहले मांग बढ़ेगी। 

 दीपोत्सव की रौनक को बढ़ाने वाले आधुनिक व पारम्परिक दीपको के बाजार में भले ही अभी ग्राहकी कम है लेकिन रोशनी के पर्व नजदीक आते ही इन दीपको की डिमांड बढ़ने लगी है जो एक हद विक्रेताओं के चेहरे पर मुस्कुराहट ला सकते है।

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